56 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
5. शांति का समाचार
- जब गौतम राजगृह में ठहरा हुआ था, तो पांच परिव्राजकों ने आकर उसकी
कुटी के निकट ही अपनी एक कुटी बनाई।
- उन पांचों परिव्राजकों के नाम थे-कौण्डिन्य, अश्वजित्, वप्प, महानाम और
भद्रिक।
- वे भी गौतम के व्यक्तित्व से प्रभावित हुए और आश्चर्य करने लगे कि इसकी
प्रव्रज्या लेने का क्या कारण हो सकता है।
- उन्होंने भी उससे ठीक उसी प्रकार प्रश्न किया, जिस प्रकार बिम्बिसार नरेश ने
किया था।
- जब उसने उन्हें प्रव्रज्या लेने की परिस्थितियाँ बताइंर्, तो उन्होंने कहा ‘‘हाँ, हम
लोगों ने सुना है। लेकिन तुम्हारे चले जाने के बाद वहाँ क्या हुआ क्या इसकी
जानकारी तुम्हें है?’’
- सिद्धार्थ ने कहा-‘‘नहीं।’’ तब उन्होंने उसे बताया कि उसके चले आने कि
बाद कपिलवस्तु में कोलियों के विरुद्ध युद्ध के विरोध में शाक्यों में एक भारी
आंदोलन छिड़ा।’’
- ‘‘पुरुष-महिलाओं, लड़के-लड़कियों द्वारा प्रदर्शन किए गए और जुलूस निकाले
गए। उनके हाथों में झंडे थे और वे नारे लगा रहे थे-‘कोलिय हमारे भाई हैं,’
‘भाई-भाई के बीच लड़ाई लड़ना गलत है,’ ‘सिद्धार्थ गौतम के देश निकाले
के बारे में सोचो’ इत्यादि।’’
- ‘‘आंदोलन का परिणाम यह हुआ कि शाक्य-संघ को एक सभा बुलानी पड़ी
और इस समस्या पर फिर से विचार किया गया। इस समय कोलिए के साथ
समझौता कर लेने के पक्ष में बहुमत था।’’
- ‘‘संघ ने पाँच शाक्यों को दूत की तरह कार्य करने के लिए चुना और उन पर
कोलियों के साथ शांति-समझौता का भार सौंपा गया।’’
- ‘‘जब कोलियों ने इसे सुना, तो वे बहुत खुश हुए। उन्होंने भी अपने में से पांच
जनों को चुन कर कोलियों के दूतों से बातचीत करके संधि-वार्ता चलाने का
निश्चय किया।’’
- ‘‘दोनों तरफ के दूत मिले और मध्यस्थता की। वे एक स्थायी परिषद बनाने
पर सहमत हुए। रोहिणी नदी के जल विभाजन संबंधी सभी प्रकार के झगड़ों