62 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
2. सांख्य का अध्ययन
- भृगु ऋषि का आश्रम छोड़कर गौतम ने आलार कालाम का निवास खोजना
शुरू किया।
- आलार कालाम वैशाली में रह रहे थे। गौतम वहाँ गया। वैशाली पहुँचकर, वह
उनके आश्रम में पहुँचा।
- आलार कालाम के पास पहुँचकर उसने कहा-‘‘मैं आपके सिद्धान्त और अनुशासन
में दीक्षित होना चाहता हूँ।’’
- उसके बाद आलार कालाम ने कहा, ‘‘तुम्हारा स्वागत है। मेरा सिद्धान्त ऐसा
है कि तुम्हारे जैसा तेज व्यक्ति बहुत जल्द ही उसे सीख सकता है और उसे
अनुभव कर सकता है। फिर उसके अनुरूप आचरण कर सकता है।’’ 5. ‘‘निश्चय ही तुम यह उच्चतम् प्रशिक्षण प्राप्त करने के योग्य हो।’’ 6. आलार कालाम के ये शब्द सुनकर राजकुमार को बहुत प्रसन्नता हुई। उसने
उत्तर दिया-
- ‘‘आपकी अपार करुणा के कारण मुझे लगता है कि सदोष होते हुए भी निर्दोष
हूँ।’’
- ‘‘इसलिए क्या आप मुझे बताएंगे कि आपका सिद्धांत क्या है?’’
- आलार ने कहा-‘‘तुम्हारा शील स्वभाव, तुम्हारे चरित्र की सच्चाई और तुम्हारे
दृढ़ निश्चय से इतना प्रभावित हूँ कि मैं तुम्हारी योग्यता जाँच हेतु तुम्हारी कोई
प्रारंभिक परीक्षा नहीं लेना चाहता।’’
‘‘ध्यान से सुनने वालों में श्रेष्ठ हमारे सिद्धान्तों को सुनो।’’
उसके बाद उन्होंने गौतम को अपना सिद्धान्त सुनाया, जिसे सांख्य-दर्शन के नाम
से जाना जाता है।
अपने प्रवचन के समापन पर आलार कालाम ने कहा -
‘‘हमारी पद्धति के सिद्धांत यहीं हैं, गौतम! मैंने तुम्हें उन्हें सक्षिप्त रूप में बता
दिया है।’’
- आलार कालाम की स्पष्ट व्याख्या से गौतम बहुत प्रसन्न हुआ। ध्यान मार्ग (चित्त
की एकाग्रता) का ढंग भी क्यों न सीख लेना चाहिए।