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सारणी
जनसंख्या प्राथमिक शिक्षा माध्यमिक शिक्षा कॉलेज शिक्षा के वर्ग वर्ग-जनसंख्या के वर्ग-जनसंख्या के वर्ग-जनसंख्या के
प्रति हजार पर प्रति हजार पर प्रति हजार पर
छात्र-संख्या छात्र-संख्या छात्र-संख्या
उन्नत हिंदू 119 3,000 1,000
मुसलमान 92 500 52
मध्यवर्ती वर्ग 38 140 24
पिछड़ा वर्ग 18 14 शून्य (या सिर्फ एक)
उपर्युक्त आँकड़ों से यह पता चलता है कि प्रत्येक समुदाय, अन्य समुदायों से प्राथमिक, माध्यमिक और कॉलेज शिक्षा के मामले में कितना आगे है। उन आँकड़ों से इस प्रेसीडेंसी के विभिन्न समुदायों में विषमता का पता चलता है, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि शिक्षा के मामले में कुछ समुदायों की स्थिति बहुत खराब है। उपरोक्त आँकड़ों से दो तथ्य निर्विवाद रूप से सामने आते हैं। पहला यह कि इस प्रेसीडेंसी के पिछड़े वर्गों की शैक्षणिक स्थिति शोचनीय है। जनसंख्या के मामले में उनका दूसरा स्थान है, लेकिन शिक्षा के मामले में उनका स्थान अन्तिम ही नहीं, अपितु उनकी संख्या भी सबसे कम है। दूसरा यह कि इस प्रेसीडेंसी के मुसलमानों ने शिक्षा के क्षेत्र में काफी प्रगति की है। 30 वर्षों की अल्पावधि में वे मध्यवर्ती और पिछड़े वर्गों से ही आगे नहीं निकल गये हैं, अपितु ब्राह्मणों तथा सम्बद्ध जातियों के भी निकट आ गये हैं।
इसके कारण क्या हो सकते हैं? इस प्रश्न के उत्तर में भी गैर-बराबरी थी। हम कहेंगे कि इसका कारण सरकार द्वारा अपनाई गयी असमान व्यवहार की नीति है। दो वर्गों के साथ व्यवहार में कितना अन्तर था, यह बात शिक्षा के बारे में पाँच वर्षों की रिपोर्ट से स्पष्ट हो जाएगी। शिक्षा के मामले में मुसलमानों के साथ (1892-96) व्यवहार के सम्बन्ध में तीसरे पंचवर्षीय प्रतिवेदन में अन्तर्विष्ट निम्नलिखित टिप्पणियाँ उल्लेखनीय हैंµ
बम्बई में मुसलमानों की शिक्षा से सम्बन्धित आँकड़ों के सम्बन्ध में निदेशक ने कहा है कि यदि परिस्थितियाँ प्रतिकूल न होतीं तो इन आँकड़ों में और अधिक वृद्धि होती। बम्बई में काफी समय से यह स्वीकार किया जा रहा है कि मुसलमान अन्य लोगों की तुलना में शिक्षा संस्थाओं का अधिक प्रयोग करते हैं। यह सामान्य प्रश्न पूछे जाने पर कि मुसलमानों में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए क्या किया गया है?
शिक्षा निदेशक ने कहाµ फ्पहली बात तो यह है कि प्रत्येक जिले में एक मुसलमान अधिकारी उपनिरीक्षक अथवा सहायक उपनिरीक्षक नियुक्त किया जाता है और हमारे तीन मुसलमान स्नातक, कैरा, शोलापुर और हैदराबाद में उपनिरीक्षक के रूप में नियुक्त किये