अछूत और ब्रिटिश सरकार - Page 105

90 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

गये हैं, जबकि चौथे की नियुक्ति इससे ऊँचे पद पर राजस्व विभाग में की गयी है। इस प्रकार ऐसा कोई जिला नहीं है जहाँ कर्मचारियों का मुसलमानों से सम्पर्क न हो। बम्बई, कराची और जूनागढ़ (काठियावाड में एक मुसलमान राज्य) में मुसलमानों के लिए उच्च विद्यालयों की व्यवस्था करने के लिए प्रयास किये गये हैं। वहाँ फीस कम रखी गयी है तथा दूसरे स्थानों पर अन्य अंजुमनों (मुसलमान संघों) द्वारा छोटे विद्यालय खोले गये हैं। विभाग उनके लाभ के लिए विशेष मानकों का भी प्रावधान करता है और कुछ क्षेत्रों में विशेष विद्यालय भी चलाता है। इसके अलावा उनके लिए एक तिहाई प्रांतीय व स्थानीय बोर्डों के वजीफे सुरक्षित रखे जाते हैं। इसके अलावा खान बहादुर काजी शहाबुद्दीन (एक समय बड़ौदा राज्य के दीवान) विशेष वजीफे स्थापित किये गये हैं। सिन्ध में आर्ट कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों के लिए खैरपुर के देशी राज्य के उत्तराधिकारी द्वारा छात्रवृत्तियाँ दी गयी हैं। (मुझे पिछले वर्ष इन्हें भरने में विशेष कठिनाई हुई थी यद्यपि यह रु 25/- प्रतिमाह के थे।) प्राथमिक पाठशालाओं में मुसलमानों के साथ फीस के मामले में बड़ी नरमी के साथ व्यवहार किया जाता है। विशेष नियमों के द्वारा इन्हें प्रशिक्षण कॉलेजों में आने के लिए प्रेरित किया जाता है। इन नियमों के अन्तर्गत हिन्दुओं की तुलना में उनसे आसान प्रश्न पूछे जाते हैं। बम्बई की संयुक्त विद्यालय समिति ने एक मुसलमान उपनिरीक्षक नियुक्त करके मुसलमानों में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में विशेष प्रयास किये हैं।

  1. इसकी तुलना में पाँचवें पंचवर्षीय प्रतिवेदन (1902-1907) में दलित वर्गों की शिक्षा के बारे में निम्नलिखित टिप्पणी की गयी हैµ फ्959 बम्बई µ बम्बई के मध्य भाग में निम्न जातियों के बच्चे निःशुल्क विद्यालयों में दाखिल किये जा रहे हैं और उन्हें पुस्तकें तथा स्लेटें आदि उपहार के रूप मे मिलती हैं........ काठियावाड़ में दलित जातियों के केवल तीन बच्चे शिक्षा पा रहे हैं। दक्षिणी भाग में 72 विशेष विद्यालय हैं या उनकी कक्षाएँ हैं, लेकिन उनमें अधिकांश अध्यापक अयोग्य हैं।य्

  2. इस असमान व्यवहार का मूल कारण हंटर आयोग की सिफारिशें हैं। हंटर आयोग मुसलमानों के प्रति कितना पक्षपाती था, यह हंटर आयोग द्वारा मुसलमानों के बारे में लायी गयी सिफारिशों की तुलना, दलित वर्गों के हित में की गयी सिफारिशों से करने से स्पष्ट हो जाएगी। मुसलमानों के सम्बन्ध में आयोग ने जो 17 सिफारिशें कीं, उनमें से नीचे लिखी, उल्लेखनीय हैंः- (1) मुसलमानों की शिक्षा को विशेष प्रोत्साहन देने पर स्थानीय संस्थाओं, नगरपालिकाओं और प्रांतों को जो खर्च करना पड़े, उसे उचित व्यय समझा जाय। (7) मुसलमानों में उच्च अंग्रेजी की, जो सबसे उत्तम शिक्षा है और जिसमें उस समुदाय को विशेष सहायता की आवश्यकता है, उसके लिए उदारता से प्रोत्साहन दिया जाये। (8) जहाँ आवश्यक हो, मुसलमानों के लिए विशेष छात्रवृत्तियों की क्रमबद्ध पद्धति स्थापित की जाए जो प्राथमिक विद्यालयों में दी जाए और माध्यमिक विद्यालयों में धार्य हो, माध्यमिक विद्यालयों में दी जाए और उच्च विद्यालयों में धार्य हो, और प्रथम