अछूत और ब्रिटिश सरकार - Page 109

94 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

समाज हमेशा दकियानूसी होता है। वह तब तक नहीं बदलता जब तक कि उसे बाध्य नहीं किया जाता और तब भी बहुत धीरे-धीरे बदलता है। जब परिवर्तन शुरू होता है तो पुराने व नये में सदैव संघर्ष भी होता है और अस्तित्व के इस संघर्ष में नये को समर्थन न मिले, तो उसके उन्मूलन का खतरा रहता है। सुधार करने का निश्चित तरीका यह है कि कानून बना कर उसे समर्थन दिया जाये। कानून की सहायता के बिना किसी बुराई में कभी कोई सुधार नहीं हो सकता। कानून की आवश्यकता तब बहुत ज्यादा होती है जब बुराइयाँ, जिनमें सुधार किया जाना है, धर्म पर आधारित हों।

पर अंग्रेजी सरकार में समाज सुधार के पक्ष में कितने कानून बने हैं? अंग्रेजी सरकार का रिकॉर्ड, समाज सुधार के मामले में बहुत ही रुकावटों वाला और बहुत ही निराशाजनक है। 150 वर्षों के समय में, केवल छह सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध कानून बनाये गये हैं।

अंग्रेजों ने जो पहला सामाजिक कानून बनाया, वह बंगाल विनियम XXI, 1795 में अन्तर्विष्ट है। यह कानून बनारस प्रांत में ब्राह्मणों को ‘कूरहा’ स्थापित करने, उनके स्त्री सम्बन्धियों या बच्चों को जख्मी करने अथवा मारने, या धरने पर बैठने से रोकने के लिए और उस प्रांत के राजकूमर कबीले को अपनी लड़कियों को मारने से रोकने के लिए है। यह कानून इस प्रकार था-

प्रस्तावना

I. द्वेष जो उनकी मृत्यु का कारण सिद्ध होने से होता है, को बनारस प्रांत के कुछ स्थ­ ानों और विशेषकर कुंठित और बुधोई परगनों में कुछ अनपढ़ लोगों ने हिन्दू धर्म के लोगों की विभीषिका और भय के कारण कानूनों की अवहेलना करने का साधन मान लिया है जिन्हें ब्राह्मणों के विरुद्ध कोई कार्यवाही करने अथवा सरकारी दावों को लागू करने का काम सौंपा जाता है। ऐसी परिस्थितियों में ब्राह्मण कभी-कभी अपने शरीर को चाबुक या उस्तरे से थोड़ा-सा या ज्यादा चीर लेते हैं, जहर निगलने की धमकी देते हैं अथवा कभी -कभी जहर या कोई पाउडर जिसे वह जहर बताते हैं, वास्तव में निगल जाते हैं अथवा कूहड़ नामक एक गोल घेरा बना लेते हैं जिसमें वे लकडि़यों या अन्य ज्वलनशील चीजों का ढेर लगा लेते हैं और स्वयं असली या नकली अनशन पर बैठ जाते हैं। कूहड़ में एक बूढ़ी महिला को बिछा देते हैं और उसकी बलि देने के लिए उसमें आग लगा देते हैं। ऐसा वे तभी करते हैं जब कोई व्यक्ति उनके खिलाफ कोई कार्यवाही करने के लिए या सरकार की ओर से या उसके प्रतिनिधियों की ओर से उत्पीड़न के लिए उनके पास आता है। इसी प्रकार उचित अथवा अनुचित रूप से कोई हानि या निराशा होने की स्थिति में निर्धारित समय में राहत न मिलने पर वे ब्राह्मण कभी-कभी अपनी महिलाओं अथवा बच्चों को भी बाहर लाते हैं और सरकार की ओर से जो चपरासी या उसके प्रतिनिधि उनकी ओर आ रहे होते हैं, उनके सामने बिठा देते हैं। वे अपनी तलवारें घुमाते हैं और चपरासी के बहुत ही