अछूत और ब्रिटिश सरकार - Page 110

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निकट आने पर इन महिलाओं या बच्चों का सिर काट देने या कत्ल करने की धमकी देते हैं। ऐसे बहुत से उदाहरण हैं जिनमें गिरफतारी या उत्पीड़न या अन्य प्रकार से छेड़छाड़ पर नाराजगी होने के कारण, उन्होंने न केवल वास्तव में अपने शरीर को जख्मी किया, अपितु अपनी तलवारों से अपने परिवारों की महिलाओं या अपनी कन्याओं या बूढ़ी महिलाओं को मौत के घाट उतार दिया। ऐसा नहीं है कि महिलाओं को हमेशा उनकी इच्छा के विरुद्ध शिकार बनाया जाता हो, इसके प्रतिकूल जिन द्वेषों में उनका पालन-पोषण किया जाता है, उसके आधार पर यह मान लिया जाता है कि भ्रांतिपूर्ण प्रतिष्ठा के या निराशा और बदले के उद्देश्यों से खुशी से आत्मोत्सर्ग करना उनके लिए आवश्यक है और यह विश्वास किया जाता है कि मृत्यु के पश्चात वे उन लोगों के उत्पीड़क बन जाएँगे जो उनकी बलि देते हैं। ऐसे सिद्धान्तों के आधार पर ये ब्राह्मण किसी दावे या प्रत्याशा को पूरा करने के उद्देश्य से जैसे ऋण की वसूली या कुछ पुण्यार्थ दान की लूट-खसोट के प्रयोजनार्थ बार-बार या तो कोई आक्रामक हथियार लेकर या विष लेकर उसी कस्बे या गाँव के दूसरे निवासी के द्वार पर जाते हैं और वहाँ ऐसे बैठ जाते हैं जैसे धरना दे रहे हों और इस विषय पर प्राप्त राय के अनुसार यह समझा जाता है कि वे उस स्थान पर तब तक अनशन पर बैठे रहते हैं, जब तक कि उनका उद्देश्य पूरा नहीं होता। जिस व्यक्ति के द्वार पर ये ब्राह्मण धरना देते हैं, उसके लिए भी यह समान रूप से आवश्यक है कि जब तक उन ब्राह्मणों की सन्तुष्टि नहीं हो जाती, तब तक वे आहार ग्रहण ना करें। जब तक ऐसा नहीं होता तब तक उसके घर से आने या जाने पर भी प्रायः पाबन्दी लगा दी जाती है, क्योंकि प्राप्त राय के अनुसार आने या जाने का प्रयास नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसा किया गया तो ब्राह्मण हथियार से अपने आप को जख्मी कर सकता है या विष अथवा पाउडर जो वह अपने साथ लाया होता है, निगल सकता है। तथापि ब्राह्मण ऐसा नहीं करते और उन्हें न्यायालयों के अधिकारियों द्वारा धरने से हटा दिया जाता है और इसका कोई बुरा प्रभाव नहीं होता। अनुभव के आधार पर यह पाया गया है कि वे सरकार की अभिरक्षा में लिए जाने के पश्चात कभी आत्महत्या करने या अपने आप को या अन्य लोगों को जख्मी करने का प्रयास नहीं करते। इन कुप्रथाओं को बन्द करने तथा अपनी बालिकाओं को आहार न देकर उनको मरने देने की क्रूर रूढि़ के पुनआर्गमन को रोकने के लिए जो जौनपुर के निकट प्रांत की सीमाओं पर रहने वाले राजकूमरों में कुछ वर्ष पूर्व तक प्रायः पाई जाती थी, अपनाए जाने वाले नियमों तथा उपायों के रूपांतरणों के साथ, एतद्द्वारा एक विनियम के रूप में अधिनियमित किया जाता है।

ब्राह्मणों द्वारा कूहड़ बनाया जाना या अपनी स्त्रियों अथवा बच्चों को विकलांग करने, घायल करने या उनकी हत्या करने की तैयारी करना

II. किसी ब्राह्मण या ब्राह्मणों के विरुद्ध कूहड़ बनाए जाने या अपनी महिलाओं या बच्चों या किसी अन्य या उनमें से कसी को विकलांग करने, घायल करने या कत्ल करने