अछूत और ब्रिटिश सरकार - Page 111

96 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

की तैयारी किये जाने के बारे में लिखित सूचना नगर के दंडाधिकारी या जिला अदालत को इस विनियम की प्रस्तावना में वर्णित ढंग से या इससे प्रायः मिलते-जुलते किसी अन्य कारण से या तरीके से किसी असन्तोष के कारण से दी जाती है, तो सूचना की सच्चाई के बारे में शपथ लिये जाने पर दंडाधिकारी तुरन्त उक्त ब्राह्मण या ब्राह्मणों को लिखित सूचना फारसी भाषा और लिपि में तथा हिन्दुस्तानी भाषा और नागरी लिपि में भेजेगा और उसकी सरकारी मुहर के अन्तर्गत यह सूचना उस अथवा उन ब्राह्मणों को उनके ऐसे सम्बन्धियों, दोस्तों या परिचितों के माध्यम से तामील की जाएगी, जो दंडाधिकारी उपयुक्त समझे और दंडाधिकारी इस प्रयोजनार्थ उनकी सेवाएँ प्राप्त कर सकेगा। उक्त ब्राह्मण या ब्राह्मणों के रिश्तेदारों, मित्रों या परिचितों के अभाव में दंडाधिकारी उसी धर्म के एक पत्रवाहक से सूचना की तामील कराएगा और इस सूचना से उक्त ब्राह्मण या ब्राह्मणों के कूहड़ तथा उसमें रखी गयी महिलाओं तथा लोगों को हटाने की या उन महिलाओं या बच्चों को घायल करने या उनकी हत्या रोकने की अपेक्षा की जाएगी। चूँकि इन दोनों तथ्यों या एक का आरोप सूचना में लगाया जाएगा, अतः इस सूचना में सम्बन्धित ब्राह्मणों या ब्राह्मणों को यह ठोस तथा उत्साहवर्धक आश्वासन भी दिया जाएगा कि यदि वे कूहड़ को और व्यक्ति या व्यक्तियों को हटा कर या महिलाओं और बच्चों को घायल न करके अथवा उनकी हत्या न करके सूचना की शर्तों का पालन करेंगे और तत्पश्चात् व्यक्तिगत रूप से या वकील के द्वारा जैसा वे उपयुक्त समझें, नगर या जिला अदालत से प्रतिकार करेंगे, तो विवाद के सम्बन्ध में उचित जाँच की जाएगी जिसके कारण निषिद्ध कार्य करने के लिए ब्राह्मण/ब्राह्मणों को बाध्य होना पड़ा। लेकिन यदि उक्त ब्राह्मण सूचना में उल्लिखित शर्तों का पालन नहीं करते तो इसके बारे में एक लिखित विवरण तैयार किया जाएगा, जिसका सत्यापन इसकी तामील करने वाले व्यक्ति/व्यक्तियों द्वारा किया जाएगा और तत्पश्चात् दंडाधिकारी अपनी सरकारी मोहर और हस्ताक्षर से उक्त ब्राह्मण/ब्राह्मणों की गिरफतारी के लिए एक वारंट जारी करेगा, जिसमें उसे/उन्हें बताया जाएगा कि किस आरोप तथा दुराग्रह के कारण उनके विरुद्ध यह कार्यवाही की जा रही है। ऐसे वारंट की तामील का काम मुस्लिम धर्म के पत्रवाहक को सौंपा जाएगा और किसी हिन्दू को इस काम के लिए नहीं भेजा जाएगा। जिस अथवा जिन ब्राह्मणों को वारंट जारी किया जाता है उसको/उनको दंडाधिकारी के समक्ष लाए जाने पर उस/उनके विरुद्ध 1793 के विनियम 9 की धारा 5 में विनिर्दिष्ट रीति से कार्यवाही की जाएगी और यदि पूर्ववर्ती जाँच से जो उक्त धारा के अधीन उसके द्वारा किये जाने की अपेक्षा की जाती है, दंडाधिकारी को यह लगेगा कि जो अपराध करने का आरोप लगाया गया है या लगाये गये हैं (अर्थात कूहड़ बनाना या महिलाओं अथवा बच्चों को घायल करना या उनकी हत्या करना), वे अपराध वास्तव में किये गये और मुख्य अपराधी अथवा सह-अपराधी के रूप में कैदी या कैदियों पर आशंका करने का आधार है तो दंडाधिकारी उसे/उन्हें जेल भेजेगा या जमानत