97
पर रिहा करेगा और उस अथवा उनके मामले पर सर्किट कोर्ट के अगले सत्र में विचार किया जाएगा और मुखबिर या फरियादी तथा गवाहों को पूर्वोक्त धारा में उल्लिखित तरीके से विचारण के समय उपस्थित होने के लिए बाध्य करेगा।
पूर्वोक्त अपराधों के विचारण की प्रक्रिया और उनके लिए दिया जाने वाला दंड
III. उपरोक्त अपराध जिस ब्राह्मण या जिन ब्राह्मणों पर लगाए जाएँगे उनका अन्य अपराधों के सम्बन्ध में 1793 के विनियम 9 और 1795 के विनियम 16 में विनिर्दिष्ट रीति से सर्किट कोर्ट विचारण करेगी, लेकिन चूँकि इस स्थानीय प्रकृति के अपराधों पर मुस्लिम कानून पर्याप्त रूप से लागू नहीं होता, एतद्द्वारा यह प्रावधान किया जाता है और यह आदेश दिया जाता है कि जहाँ सर्किट कोर्ट की राय में कूहड़ बनाने अथवा महिलाओं या बच्चों को घायल करने या उनकी हत्या करने के लिए मुख्य अपराधी होने का आरोप साबित हो जाएगा, वहाँ उक्त न्यायालय, कैदी को उसकी वार्षिक आय की राशि के बराबर जुर्माने का भुगतान करने का दंड देगा, जिसका अनुमान वे इसके बारे में उपलब्ध जानकारी के आधार पर लगाएँगे और यदि सबूत से न्यायालय का यह समाधान होता है कि कैदी एक सहअपराधी के रूप में दोषी है, तो उसको, उसकी अनुमानित वार्षिक आय के एक चौथाई के बराबर जुर्माने का भुगतान करने का दंड दिया जाएगा और वे तब तक जेल में रहेंगे जब तक कि जुर्माने की राशि का भुगतान नहीं कर दिया जाता था, या जब तक वे अपनी रिहाई की तारीख से 6 महीने के भीतर जुर्माने का भुगतान करने के लिए सर्किट कोर्ट को, अथवा उक्त कोर्ट के समापन के पश्चात् दंडाधिकारी को पूरी तथा पर्याप्त जमानत नहीं देते और ऐसे व्यक्ति अपनी रिहाई से पूर्व कंगाल होने पर या स्वयं पर लगे जुर्माने के भुगतान की जमानत देने पर सर्किट कोर्ट में या उसकी अनुपस्थिति में दंडाधिकारी को एक या अधिक विश्वसनीय व्यक्तियों से इस आशय की जमानत देते कि वह भविष्य में इस प्रकार का अपराध नहीं करेगा।
ऐसे जुर्माने कम करने का अधिकार निजामुत अदौलत को दिया गया
IV. धारा 3 के अधीन सर्किट कोर्ट द्वारा दिये गये सभी दंड बीच में रोके बिना दस दिन के भीतर निजामुत अदौलत को भेजे जाएँगे और यह अदालत लगाये गये जुर्माने में ऐसी कमी कर सकेगी या इतना जुर्माना वापस कर सकेगी जो वह उचित समझे, लेकिन जब तक निजामुत अदौलत द्वारा आदेश जारी नहीं किये जाते, तब तक सर्किट कोर्ट के दंड को पूरी मान्यता दी जाएगी और तदनुसार उसे प्रभावी किया जाएगा।
उन फरार होने वाले ब्राह्मणों के लिए जुर्माना, जिनकी गिरफतारी के लिए दंडाधिकारी ने धारा-2 के अधीन वारंट जारी किया होगा।
V. यदि कोई या कई ब्राह्मण जिनके विरुद्ध नगर या जिला दंडाधिकारी धारा 2 में विनिर्दिष्ट वारंट जारी करता है, वारंट की तामील करने के लिए प्रतिनियुक्त पत्रवाहक