99
अभ्यावेदन करेगा और तहसीलदार के या जिलाधीश के दस्तक से प्रतिनियुक्त पत्रवाहक या किसी अन्य विश्वसनीय व्यक्ति/व्यक्तियों के न्यायालय में उपस्थित होने पर और उन के द्वारा शपथ लेकर यह कहने पर कि ब्राह्मण/ब्राह्मणों द्वारा कूहड़ बनाए जाने अथवा महिलाओं और बच्चों या उनमें से मिली किसी को घायल किये जाने या हत्या किये जाने, जो भी स्थिति होगी, के बारे में जिलाधीश ने अपने अभ्यावेदन में जो परिस्थितियाँ बताई हैं वे सही हैं, तो दंडाधिकारी ऐसे ब्राह्मणों को अपनी सरकारी मुहर के अधीन फारसी भाषा और लिपि में तथा हिन्दुस्तानी भाषा और नागरी लिपि में एक लिखित सूचना जारी करेगा जो उक्त ब्राह्मण/ब्राह्मणों के ऐसे सम्बन्धियों, मित्रों या परिचितों द्वारा उस/उनको तामील की जाएगी जिन्हें दंडाधिकारी उचित समझें और वह इस प्रयोजनार्थ उनकी सेवाएँ प्राप्त कर सकेगा और उक्त ब्राह्मण/ब्राह्मणों के ऐसे सम्बन्धियों, मित्रों या परिचितों के अभाव में दंडाधिकारी उसी धर्म के एक पत्रवाहक द्वारा उस सूचना की तामील करवाएगा, जिसके अनुसार उक्त ब्राह्मण/ब्राह्मणों को कूहड़ तथा इसमें रखी महिलाओं तथा अन्य लोगों को हटाना होगा अथवा महिलाओं या बच्चों को घायल करने या उनकी हत्या करने की तैयारी को रोकना होगा। इसी प्रकार उससे/उनसे माँगी गयी लगान राजस्व की बकाया राशि का उन्हें भुगतान करना होगा या नगर अथवा जिला अदालत में उपस्थित होकर जिस राशि का वहाँ वे भुगतान नहीं करना चाहते हैं, उसके बारे में जमानत देनी होगी और यह बताना होगा कि वह/वे किन कारणों से भुगतान नहीं करना चाहते हैं। तत्पश्चात मामले के गुणदोषों पर विचार किया जाएगा और 1795 के विनियम 6 में उल्लिखित सिद्धान्तों के अनुसार इसका फैसला किया जाएगा, जैसा कि राजस्व की अन्य विवादास्पद माँगों और लेखों के मामले में किया जाता है। उक्त सूचना में सम्बन्धित ब्राह्मण/ब्राह्मणों को इस आशय का ठोस और उत्साहवर्धक आश्वासन भी दिया जाएगा कि यदि वे सूचना में दिये गये आदेशों का पालन करते हुए कूहड़ तथा उसमें रखे व्यक्तियों को हटा देते हैं अथवा महिलाओं और बच्चों को घायल करने या उनकी हत्या करने की तैयारी को रोक देते हैं और माँगी गयी राजस्व की बकाया राशि या तो अदा कर देते हैं या व्यक्तिगत रूप से अथवा वकील के माध्यम से नगर या जिला न्यायालय के समक्ष प्रतिकार करते हैं और बकाया राशि की जमानत देते हैं, तो माँग के औचित्य के विरुद्ध वे जो तर्क देंगे उनकी समुचित जाँच की जाएगी। यदि सूचना जारी करने पर उक्त ब्राह्मण इसकी अपेक्षाओं का पालन नहीं करेंगे, तो इस आशय का एक लिखित विवरण इसकी तामील से सम्बन्धित व्यक्ति/व्यक्तियों द्वारा किया जाएगा तथा सत्यापित किया जाएगा और दंडाधि कारी तुरन्त अपनी सरकारी मुहर और हस्ताक्षरों से ऐसे ब्राह्मण/ब्राह्मणों की गिरफतारी के लिए वारंट जारी करेगा, जिसमें उस अपराध, दुराचार तथा बकाया राशि का उल्लेख किया जाएगा, जिसका उस/उन पर आरोप है, और जैसा कि धारा 2 में निर्देश दिया गया है, वारंट की तामील मुस्लिम व्यक्ति के द्वारा की जाएगी। यदि ब्राह्मण इसकी तामील