100 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
करने के लिए प्रतिनियुक्त पत्रवाहक की आज्ञा का पालन करने से इंकार करता है/करते हैं या विरोध करते अथवा करवाते हैं या उनके द्वारा अभिरक्षा में लिए जाने के पश्चात् बच कर निकल जाते हैं अथवा फरार हो जाते हैं या अपने आप को किसी मकान या इमारत में बन्द कर लेते हैं या किसी जगह चले जाते हैं, ताकि उस/उन पर वारंट की तामील न की जा सके तो मजिस्ट्रेट इस आशय की जानकारी मिलने पर जिलाधीश को एक हुकमनामा जारी करेगा, जिसके अनुसार उसे निकटतम तहसीलदार को उस ब्राह्मण/ उन ब्राह्मणों की भूसम्पत्ति जब्त करने के आदेश देने होंगे जो उस/उनके पास जायदाद, रहन या खेत या लखराजे के रूप में हो। यह भूसम्पत्ति तब तक जब्त रहेगी और इसका लाभ सरकार को होगा जब तक कि बकाया राशि उस भूसम्पत्ति से होने वाले मुनाफे से चुकता नहीं हो जाती या उक्त ब्राह्मण अपने अन्य साधनों से उसे पूरा नहीं कर देते और जब तक उक्त ब्राह्मण न्यायालय के समक्ष लाये नहीं जाते या स्वयं उपस्थित नहीं होते तथा कूहड़ बनाने अथवा अपनी महिलाओं या बच्चों को घायल करने या उनका कत्ल करने या उनमें से किसी एक की तैयारी करने के आरोप में मुख्य अपराधियों या सहअपराधियों के रूप में उन पर उसी रीति से मुकदमा नहीं चलाया जाता जैसा कि धारा 2, 3 और 4 में प्रावधान है।
कूहड़ बनाने वाले ब्राह्मणों तथा इसे प्रज्वलित करने वाले व्यक्तियों पर किसी व्यक्ति या व्यक्तियों की जान की हानि होने से हत्या के आरोप में मुकदमा चलाया जाएगा।
VII. यदि कोई एक ब्राह्मण या अनेक ब्राह्मण सरकार या उसके अधिकारियों या सेवकों के विरुद्ध सही या निराधार असन्तोष या सन्त्रास के कारण एक कूहड़ बनाता है, जिसमें इसके बनने से इसके हटाए जाने तक की अवधि के दौरान एक या अधिक व्यक्ति जला कर मार दिये जाते हैं या अन्यथा किसी व्यक्ति द्वारा ऐसे कूहड़ को आग लगा दिये जाने के कारण अपनी जिन्दगी खो बैठते हैं तो उस कूहड़ को बनवाने वाला या वाले ब्राह्मणों पर हत्या का आरोप लगाया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त उस व्यक्ति या उन व्यक्तियों पर भी हत्या का आरोप लगाया जाएगा, जिन्हें ढेर या विचाराधीन दाह्य वस्तुओं को आग लगाने या आग लगाने में सहायता करने के काम में लगाया गया होगा और तथ्य साबित होने तथा सर्किट कोर्ट की तसल्ली होने पर कूहड़ को आग लगाने वाले ब्राह्मण/ब्राह्मणों तथा व्यक्ति/व्यक्तियों को उक्त न्यायालय में मुकदमा चलाए जाने पर उसी रीति से मृत्यु दंड की सजा दी जाएगी, जैसी कि उन्होंने मुस्लिम कानून के सिद्धान्तों के अनुसार कत्ल और या पहले सोच समझकर हत्या की हो और दोषी पाए गये हों। ऐसे मामले की जानकारी यथासम्भव अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने के उद्देश्य से (वह मुसलमान विधि अधिकारियों के भविष्य के अनुरूप हो या नहीं) ऐसे मामले में दोषी पाए ब्राह्मण अथवा ब्राह्मणों को सजा देने का आदेश औपचारिक रूप