अछूत और ब्रिटिश सरकार - Page 117

102 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

अन्य महिला या बच्चे को इसलिए कत्ल करेंगे कि उसके/उनके किसी व्यक्ति के साथ मतभेद हैं तो उस पर/उन पर ऐसी मानव हत्या के लिए मुकदमा चलाया जाएगा और तथ्य साबित होने पर सर्किट अदालत उन्हें मृत्यु दंड देगी बशर्ते कि धारा-7 में उल्लिखित मामलों की तरह ऐसा मामला निजामत अदालत को भेजे जाने पर निजामत अदालत दंड कम नहीं कर देती या माफ नहीं कर देती। यदि किसी ब्राह्मण अथवा ब्राह्मणों के परिवार इस धारा के अन्तर्गत हत्या के दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें 17 जून, 1789 के परिषद् के गवर्नर जनरल के आदेश के अनुसार तथा इसके अनुसरण में उसी वर्ष 7 जुलाई को बनारस से रेजीडेंसी द्वारा किये गये प्रकाशन के अनुसार बनारस प्रांत और कम्पनी के राज्यक्षेत्र से निष्कासित कर दिया जाएगा। उसकी भूसम्पत्ति जब्त कर ली जाएगी और ऐसे ढंग से बेच दी जाएगी जो सरकार उचित समझे और तदनुसार सर्किट कोर्ट इस आदेश को इस धारा के अन्तर्गत हत्या के लिए ब्राह्मणों को दिये जाने वाले सभी दंडों में जोड़ देगी और साथ ही ऐसे दंड और आदेश की सूचना निजामत अदालत को देगी। सर्किट कोर्ट निजामत अदालत को ऐसे ब्राह्मण अथवा ब्राह्मणों के परिवार के सदस्यों की यथासम्भव सही संख्या, लिंग, आयु का ब्योरा भी देगी तथा यह राय भी देगी कि ऐसे ब्राह्मणों अथवा ब्राह्मण के परिवारों को निष्कासन की सजा देना अथवा उनकी भू-सम्पत्ति की जब्ती के आदेश की पुष्टि करना, सजा कम करना या रद्द करना कहाँ तक उचित या अनुचित होगा। निजामत अदालत इस दंड या आदेश पर और सर्किट कोर्ट की राय पर विचार करने के बाद या तो दंड की पूर्णतया पुष्टि करेगी, या परिषद् के गवर्नर जनरल से उक्त दंड तथा आदेश में ऐसी कमी करने की सिफारिश करेगी, जो उसे उचित प्रतीत हो, और सभी मामलों में ऐसे ब्राह्मण अथवा ब्राह्मणों तथा उसके या उनके परिवार की भू-सम्पत्ति की जब्ती की पुष्टि निजामत अदालत द्वारा की जाएगी और उक्त न्यायालय इसकी सलाह देगा। जहाँ तक भू-सम्पत्ति की जब्ती का सम्बन्ध है, ऐसी सजा नहीं दी जाएगी जब तक कि परिषद् का गवर्नर जनरल इसकी स्वीकृति नहीं देता और निर्देश नहीं देता कि इस तरह जब्त की गयी भू-सम्पत्ति का निपटारा किस तरह किया जाएगा।

अपराधियों की पारिवारिक भूमि को जब्त करने की सीमा

X. धारा 9 के अन्तर्गत निजामत अदालत को सर्किट कोर्ट द्वारा दी गयी सजा को कम करने के बारे में परिषद् के गवर्नर जनरल द्वारा सिफारिश करने की जो विवेकाधीन शक्ति दी गयी है, उसका प्रयोग करते समय इस नियम का पालन किया जाएगा कि जब कभी परिषद् का गवर्नर जनरल, हत्या करने वाले पक्षकार अथवा पक्षकारों को या उसके अथवा उसके परिवार/परिवारों को देश निकाला देना उचित समझता है, तो ऐसे मामलों में भू-सम्पत्ति जब्त नहीं की जाएगी, अपितु वह सम्पत्ति परिवार के उन सदस्यों की होगी तथा उनके कब्जे में रहेगी, जिनको देश निकाला नहीं दिया जाएगा।