अछूत और ब्रिटिश सरकार - Page 118

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ब्राह्मणों के धरने पर बैठने के सम्बन्ध में विनियम

XI. (पहला)ः परिषद् के गवर्नर जनरल के दिनांक 2 नवंबर, 1792, के आदेश तथा इसके परिणामस्वरूप उसी वर्ष 22 दिसंबर को बनारस में जारी किये गये प्रकाशन तथा परिषद् के गवर्नर जनरल के आदेश के अनुसार धरना को रोकने के लिए तथा ऐसा अपराध करने वाले ब्राह्मणों पर मुकदमा चलाने और उन्हें सजा देने के लिए निम्नलिखित नियम बनाए जाते हैंµ

दंडाधिकारी धरने पर बैठने वाले ब्राह्मणों की गिरफतारी करवाएगा

(दूसरा)ः धरने पर बैठे किसी ब्राह्मण अथवा ब्राह्मणों के विरुद्ध दंडाधिकारी के पास लिखित रूप में कोई शिकायत आने पर यह शपथ लेगा कि जो जानकारी दी गयी है वह सही है और उसके बाद अपनी मुहर और हस्ताक्षर से उन लोगों की गिरफतारी के वारंट जारी करेगा, जिनके विरुद्ध शिकायत की गयी है और उस कैदी अथवा कैदियों को दंडाधिकारी के समक्ष लाये जाने पर वह आरोप की परिस्थितियों का पता लगाएगा और कैदी अथवा कैदियों की शिकायत करने वाले व्यक्ति/ऐसे अन्य व्यक्तियों की जाँच करेगा, जिनको कथित अपराध की कोई जानकारी होगी। इन लोगों का बयान लेते समय उनसे शपथ ली जाएगी और उनके बयान लिखे जाएँगे। इस जाँच के बाद यदि दंडाधि कारी को लगेगा कि उस कैदी अथवा कैदियों के विरुद्ध जो अपराध करने का आरोप था, वह अपराध हुआ ही नहीं है या उस अपराध में उसका या उनका हाथ होने की आशंका करने का कोई आधार नहीं है, तो दंडाधिकारी ऐसे ब्राह्मण अथवा ब्राह्मणों की तुरन्त रिहाई करवाएगा और 1793 के विनियम 9 की धारा 17 में विनिर्दिष्ट रीति से सर्किट कोर्ट की जानकारी के लिए इसके कारण दर्ज करेगा। इसके प्रतिकूल यदि दंडाधिकारी को यह लगेगा कि अपराध वास्तव में हुआ और अपराध करने या करवाने में हाथ होने का उस कैदी अथवा कैदियों में सन्देह करने का आधार है, तो दंडाधिकारी उसे अथवा उन्हें कैद में डालेगा या जमानत पर रिहा करेगा (जैसा भी वह उचित समझे) और सर्किट कोर्ट के अगले सत्र में उसके अथवा उनके मुकदमे की सुनवाई करेगा, शिकायतकर्ता को उपस्थित होने तथा अभियोग चलाने के आदेश देगा और गवाहों को 1793 के विनियम 9 की धारा 5 में अपेक्षित विधि से उपस्थित होने तथा गवाही देने के आदेश देगा। इस मामले पर विचार, सर्किट कोर्ट के समक्ष उक्त विनियम तथा 1795 के विनियम 16 में विनिर्दिष्ट रीति से होगा। गवाही खत्म होने के बाद मामला लिखित रूप में व्यवस्था देने के लिए अथवा यह बताने के लिए कि क्या शास्त्रों के अनुसार गवाही में दिये गये तथ्यों से यह साबित हो जाता है कि कैदी धरने पर बैठा था या बैठे थे और यदि ऐसी व्यवस्था हाँ में होती है तो सर्किट कोर्ट उस अपराधी अथवा उन अपराधियों को बनारस प्रांत से निष्कासित करने की सजा देगी और उस कैदी अथवा उन कैदियों