104 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
के वे सभी अधिकार अथवा दावे समाप्त हो जाएँगे, जिनको प्राप्त करने के लिए अपराध किया गया। तथापि यह सजा तब तक नहीं दी जाएगी जब तक कि सर्किट कोर्ट इसकी सूचना निजामत अदालत को नहीं दे देती और इस बात की पुष्टि नहीं हो जाती कि पूरी सजा दी जाये या इस आशय के निर्देश नहीं दे दिये जाते कि सजा कम करके केवल प्रांत से निष्कासित करने की सजा दी जाये या उस सम्पत्ति पर कैदी अथवा कैदियों के अधिकार अथवा दावे को खत्म करने की सजा दी जाये जिसके लिए वह कैदी अथवा वे कैदी धरने पर बैठे। उक्त कोर्ट जो भी उचित समझे, कर सकेगी।
जब धरना देने की सभी कानूनी आवश्यकताएँ पूरी नहीं होंगी तब सर्किट अदालत किस प्रकार कार्य करेगी, यद्यपि अपराध वास्तव में हुआ हो
XII. यदि धारा 2 के अधीन पंडित यह व्यवस्था कर देता है कि गवाही के दौरान शपथ लेकर जो परिस्थितियाँ बयान की गयी हैं उनके आधार पर धरने देने का अपराध नहीं बनता, लेकिन सर्किट कोर्ट अपने समक्ष उपस्थित साक्ष्य के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुँचती है कि कैदी ने वास्तव में धरना दिया है। यदि वे सभी परिस्थितियाँ मौजूद नहीं हैं, जो एक कृत्य को हिन्दू ग्रन्थों के अनुसार धरना की संज्ञा देने के लिए कानूनी रूप से आवश्यक है, ऐसी परिस्थितियों में परिषद के गवर्नर जनरल के 7 नवंबर, 1974 के आदेश के अनुसार उक्त न्यायालय कैदी या कैदियों से इस आशय का मुचलका या वादा लेगी कि यदि ऐसा कैदी या ऐसे कैदी, फिर किसी धरने पर बैठेंगे या धरने से मिलता-जुलता कोई अन्य काम करेंगे तो सर्किट अदालत में उन पर मुकदमा चलाए जाने की स्थिति में उक्त अदालत में मुकदमे पर विचार के समय उपस्थित अदालत के न्यायाधीश समझेंगे कि यह काम धरना है या धरने के बराबर है और परिषद के गवर्नर जनरल के आदेश के अनुसार उसे/उन्हें प्रांत से निष्कासित कर दिया जाएगा और विचाराधीन सम्पत्ति पर उनका अधिकार अथवा दावा समाप्त कर दिया जाएगा।
अपनी बालिकाओं को छोड़ देने अथवा पोषाहार के अभाव में उन्हें मरने देने की स्थिति में राजकूमरों पर कैसे मुकदमा चलाया जाएगा
XIII. दिसंबर 1789 में राजकूमरों की जनजाति ने वादा किया था कि वे अपनी बा लिकाओं को भूख से मारने की प्रथा बन्द कर देंगे। तदनुसार, अब यह कानून बनाया जाता है कि नगर और जिला अदालतों तथा बनारस में सर्किट कोर्ट की स्थापना होने और इनके
खुलने के पश्चात यदि यह सिद्ध हो जाता है कि किसी राजकूमर ने जानबूझ कर पोषाहार ने देकर अपनी बालिका की मृत्यु होने दी है, तो इस विनियम की प्रस्तावना के अनुसार अथवा किसी अन्य रीति से दंडाधिकारी शपथ पत्र पर उनके बारे में जानकारी मिलने अथवा कोई अन्य जानकारी या सबूत मिलने पर जिसे वह पर्याप्त समझे, निर्धारित ढंग से ऐसे राजकूमर की गिरफतारी करवा कर 1793 के विनियम 9 की धारा 5 के अनुसार जाँच के