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आदेश देगा। यदि दंडाधिकारी को लगे कि वास्तव में अपराध हुआ है और अपराध करने में अपराधी का हाथ होने की आशंका का आधार है तो दंडाधिकारी उसे जेल भिजवा दे, ताकि सर्किट कोर्ट के समक्ष मुकदमा किया जा सके, साथ ही उपरोक्त धारा और विनियम के अनुसार अन्य आवश्यक पूर्वोपाय करे ताकि मूल फरियादी अथवा मुखबिर तथा गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित की जा सके और तदनुसार कैदी पर मुकदमा चलाया जाये। ऐसा करते समय वही तरीका अपनाया जाएगा, जो हत्या के अन्य मामलों के सम्बन्ध में 1793 के विनियम 9 और 1795 के विनियम 16 के अनुसार अपनाया जाता है।
ब्रिटिश शासन ने जो दूसरा सामाजिक विधान बनाया, वह 1802 के बंगाल विनियम छह में अन्तर्विष्ट है। यह विनियम सागर तथा अन्य स्थानों पर बच्चों की बलि को रोकने के बारे में है। यह निम्न रूप में अधिनियमित हुआ -
विनियम VI
1802 ई.
सागर तथा अन्य स्थानों पर बच्चों की बलि रोकने के लिए विनियम। यह 20 अगस्त 1802 को (परिषद के गवर्नर जनरल द्वारा पारित हुआ।
परिषद के गवर्नर जनरल को यह अभिवेदन किया गया है कि बच्चों को पानी में डुबा कर अथवा शार्क मछली को खिलाकर बलि देने की अनुचित और अमानवीय प्रथा सागर द्वीप, बांसवाड़ा, चौघघ तथा गंगा के किनारे अन्य स्थानों पर चालू है। विशेष तौर से सागर में इस प्रकार के बलिदान एक निश्चित समय पर होते हैं, जैसे नवंबर तथा जनवरी में पूर्णिमा के दिन। ऐसे अवसरों पर बूढ़े व्यक्तियों ने भी इस प्रकार अपनी जान न्योछावर की है। सागर में समुद्र में फेंके गये बच्चे आमतौर से बचाए नहीं जाते, जैसी कि अन्य स्थानों पर प्रथा है। लेकिन इसके प्रतिकूल कुछ मामलों में ऐसी बलि बड़े नृशंस ढंग से दी जाती है। इस प्रथा का आधार अंधविश्वासी मनौतियाँ हैं। इस प्रथा की हिंदू कानून ने मंजूरी नहीं दी है और न ही धार्मिक विधान अथवा आम लोगों ने इसका समर्थन किया है। भारत की हिन्दू अथवा मुसलमान सरकारों ने भी इसका कभी अधिकार नहीं दिया। अतः ऐसे अपराध करने वाले लोगों को दंड दिया जा सकता है। अपराध से छुटकारा पाने के लिए प्रथा का तर्क अस्वीकार्य होगा। लेकिन इस अमानवीय प्रथा को प्रभावशाली ढंग से रोकने के लिए परिषद/गवर्नर जनरल ने निम्नलिखित विनियम बनाया है जो इसकी उद्घोषणा की तारीख से बंगाल, उड़ीसा और बनारस प्रांतों में लागू होगा।
यदि कोई एक व्यक्ति या कई व्यक्ति जानबूझ कर और जान लेने के इरादे से किसी बच्चे या ऐसे व्यक्ति को जो अभी वयस्क नहीं हुआ है, समुद्र या गंगा नदी या किसी अन्य नदी या पानी में उसकी सहमति से या उसकी सहमति के बिना फेंके या फिंकवाएँगे और यदि इसके परिणामस्वरूप वह व्यक्ति डूब कर मर जाता है या शार्क