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हिन्दू इस प्रथा को न तो मानते हैं और न ही इसे चालू रखते हैं। कुछ बड़े जिलों में यह है ही नहीं, पर जिन जिलों में यह प्रायः अपनाई जाती है, वहाँ इसका कारण अनेक मामलों में अत्याचार है, जो स्वयं हिन्दुओं के लिए दहलाने वाली बात है और उनकी नजर में गैर-कानूनी और अन्यायपूर्ण है। ऐसी प्रथाओं को हतोत्साहित करने और रोकने के लिए अब तक जो तरीके अपनाए गये हैं वे विफल रहे हैं। परिषद् के गवर्नर जनरल की यह पक्की धारणा है कि इस प्रकार के कुकृत्यों को तब तक प्रभावी ढंग से नहीं रोका जा सकता, जब तक कि इस प्रथा को ही समाप्त नहीं कर दिया जाता। इन विचारों से प्रेरित होकर परिषद् के गवर्नर जनरल ने भारत में शासन प्रणाली के सर्वप्रथम और सर्वासि प्रणाली का पालन न्याय और मानवता का उल्लंघन किये बिना किया जा सकता है। निम्नलिखित नियम बनाना उचित समझा है। ये नियम तत्काल इनकी उद्घोषणा की तारीख से, फोर्ट विलियम प्रेसीडेंसी को छोड़कर सभी राज्यक्षेत्रों में लागू होंगे।
II. सती प्रथा अथवा हिन्दुओं की विधवाओं को जीवित जलाने या दफनाने की प्रथा का एतद्द्वारा अवैध और दंड न्यायालयों द्वारा दंडनीय घोषित किया जाता है।
III. प्रथमµ सभी जमींदारों, ताल्लुकेदारों या भूमि के दूसरे मालिकों, चाहे मालगुजारी या लखीराज सभी प्रकार के किसानों और सभी प्रकार के भूमि के अवर वार्षिकी भोगियों, सभी आश्रितों, ताल्लुकेदारों सभी नायबों और अन्य स्थानीय एजेंटों को सरकार की ओर से भू-राजस्व और लगान की वसूली में लगे सभी देशी अधिकारियों अथवा कोई आम वाईस और सभी मंडलों अथवा गाँवों के अन्य मुखियाओं को विशेष रूप से इस बात के लिए उत्तरदायी घोषित किया जाता है कि वे उपरोक्त किसी भी प्रकार की सम्भावित बलि के बारे में निकटतम थानाध्यक्ष को तुरन्त जानकारी देंगे। यदि कोई जमींदार अथवा उपरोक्त में से कोई व्यक्ति जिसे ऐसी जिम्मेदारी दी जाती है, के उपर अपेक्षित जानकारी जानबूझकर नहीं देने अथवा देर से देने के लिए दोषी पाया जाता है, तो दंडाधिकारी अथवा संयुक्त दंडाधिकारी उस पर अधिकतम 200 रुपये का जुर्माना लगा सकेगा और भुगतान न करने की स्थिति में उसे अधिकतम छः महीने की अवधि के लिए कारावास का दंड दे सकेगा।
इरादतन बलि के बारे में सूचना मिलने पर पुलिस दरोगा कैसे कार्रवाई करेंगे
द्वितीयµ सूचना मिलने पर कि इस विनियम द्वारा गैर-कानूनी घोषित की गयी बलि होने की सम्भावना में तुरन्त ही या तो थानेदार स्वयं घटनास्थल पर जाएगा या अपने मुहर्रिर या जमादार को वहाँ भेजेगा जिसके साथ हिन्दू धर्म के एक या अनेक बरकुन्डोज जाएँगे और पुलिस अधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि वह कार्यक्रम के लिए इकट्ठे हुए लोगों के समक्ष यह घोषित करे कि यह गैर-कानूनी है और वह उन्हें यह समझाने का