अछूत और ब्रिटिश सरकार - Page 123

108 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

प्रयास करे कि वे तितर-बितर हो जाएँ और उन्हें यह भी स्पष्ट करे कि यदि वहीं डटे रहे, तो अपराध के दोषी वे भी हो जाएँगे और दंड न्यायालय उन्हें दंड दे सकेगा। यदि वहाँ एकत्र हुए लोग इस बात की परवाह नहीं करते हैं और कार्यक्रम को सम्पन्न करने के लिए आगे बढ़ते हैं, तो पुलिस अधिकारियों का यह कर्तव्य होगा कि वे बलि को रोकने के लिए हर सम्भव वैध तरीके का प्रयोग करें और उस व्यक्ति को गिरफतार कर लें, जो उस कार्यक्रम को सम्पन्न करने में सहायता दे रहा है और उन लोगों को उत्प्रेरित कर रहा है। यदि पुलिस अधिकारी उनको गिरफतार नहीं कर पाते, तो वे उनके नाम और उनके निवास स्थान के बारे में जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करें और पूरा ब्यौरा तत्काल दंडाधिकारी या संयुक्त दंडाधिकारी को उसके आदेशों के लिए भेज देंगे।

बलि की सूचना बलि से पूर्व न मिल पाने पर कैसे कार्यवाही की जाएगी

तृतीयµ इस विनियम द्वारा अवैध घोषित किसी बलि की अधिसूचना बलि होने तक पुलिस अधिकारियों तक न पहुँचने की स्थिति में, अथवा पुलिस अधिकारियों के घटनास्थल पर पहुँचने से पूर्व, बलि हो जाने की स्थिति में, पुलिस मामले की परिस्थितियों की उसी तरह पूरी जाँच करेगी जैसी कि अप्राकृतिक मृत्यु के सभी अन्य अवसरों पर की जाती है और उसकी रिपोर्ट उस दंडाधिकारी अथवा संयुक्त दंडाधिकारी को सूचना एवं आदेशों के लिए देगी, जिसके अधीन वह है।

IV. प्रथमµ पूर्वोक्त प्रावधानों के अन्तर्गत पुलिस दरोगा से अपेक्षित रिपोर्ट प्राप्त होने पर जिस क्षेत्र में बलि हुई है, उस क्षेत्र का दंडाधिकारी या संयुक्त दंडाधिकारी मामले की परिस्थितियों की जाँच करेगा और इसे बढ़ावा देने वाले लोगों को सर्किट कोर्ट के समक्ष विचारण के लिए लाने के लिए आवश्यक उपाय करेगा।

एक हिन्दू विधवा की बलि में सहायता देने और उत्प्रेरित करने के दोषी व्यक्ति आपराधिक मानव वध के दोषी समझे जाएँगे और दंडित होंगे।

द्वितीयµ एतद्द्वारा यह घोषित किया जाता है कि इस विनियम की उद्घोषणा के पश्चात एक हिन्दू विधवा को जीवित जलाकर अथवा दफनाकर उसकी बलि में सहायता देने तथा दुष्प्रेरित करने के सभी सिद्ध दोषी व्यक्ति, उसने यह बलि स्वेच्छा से की हो या नहीं, आपराधिक मानव वध के दोषी समझे जाएँगे और सर्किट कोर्ट के स्वविवेक से मामले के स्वरूप और परिस्थितियों के अनुसार तथा अपराधी के विरुद्ध पाये गये दोष की मात्रा के अनुरूप, जुर्माने अथवा कारावास अथवा जुर्मानों और कारावास दोनों के लिए दंडनीय होंगे और इसे न्यायोचित ठहराने के लिए यह तर्क स्वीकार नहीं किया जाएगा कि बलि हुई महिला की यह इच्छा थी कि वह उसकी मृत्यु में उसकी सहायता करे।

तृतीयµ उपरोक्त अपराधी, सर्किट कोर्ट के समक्ष विचारण के लिए सुपुर्द किये