अछूत और ब्रिटिश सरकार - Page 133

118 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

यह सोच कर कि हिन्दुओं में तेजी से चेतना लाने से यह समस्या हल हो जाएगी, ब्रिटिश सरकार ने अछूतों की उपेक्षा की और यह समझ लिया कि एक सरकार के रूप में अछूतों की दशा सुधारने में सहायता करने के लिए उनको कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं है। ब्रिटिश सरकार ने अछूतों जैसी अपनी असहाय प्रजा और दलित वर्ग की इस तरह उपेक्षा करने के सम्बन्ध में क्या सफाई दी इसका उत्तर बहुत स्पष्ट है। उन्होंने इसकी सफाई के रूप में यह तर्क दिया कि छुआछूत की बुराई उनकी देन नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि उन्होंने छुआछूत की बीमारी को दूर करने के लिए कुछ नहीं किया, तो इसके लिए उनको दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए, क्योंकि यह उनकी देन नहीं है। 1856 में बम्बई सरकार द्वारा इसकी स्पष्ट रूप से घोषणा की गयी। जून 1856 में एक महार लड़के की ओर से बम्बई सरकार के समक्ष एक याचिका प्रस्तुत की गयी जिसमें शिकायत की गयी कि यद्यपि वह विद्यालय की सामान्य फीस देने को तैयार है उसे धारवाड़ सरकारी स्कूल में प्रवेश नहीं दिया गया है। आवेदन पत्र को निपटाते हुए बम्बई सरकार ने इस मामले को इतना महत्त्वपूर्ण समझा कि उसने दिनांक 21 जुलाई, 1856 को एक प्रस्ताव जारी किया जिसका पूरा पाठ इस प्रकार हैµ

फ्1. पत्राचार में चर्चित प्रश्न में एक बहुत बड़ी व्यावहारिक कठिनाई है।य्

फ्2. इसमें कोई सन्देह नहीं है कि सामान्य न्याय, महार याचिकादाता के पक्ष में है, और सरकार का विश्वास है कि जिन पूर्वग्रहों के कारण वह धारवाड़ में विद्यमान शिक्षा माध्यमों से इस समय लाभ नहीं उठा पाता, वे शीघ्र ही दूर हो जाएँगे।य्

फ्3. किन्तु सरकार के लिए इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि एक या दो व्यक्तियों के लिए पीढि़यों के पूर्वग्रह में संक्षिप्त ढंग से हस्तक्षेप करने से शिक्षा के मामले में सम्भवतया काफी नुकसान होगा। याचिकादाता को जो असुविधा हुई है, वह इस सरकार की देन नहीं है और यह असुविधा ऐसी है जिसे सरकार उसके पक्ष में हस्तक्षेप करके एकदम दूर नहीं कर सकती जैसा कि उसने सरकार से करने की याचिका की है।य्

निस्संदेह यह सरकार के कर्तव्यों का सहज नजरिया है, यह जिम्मेवार नजरिया नहीं है। एक सभ्य सरकार को निश्चित रूप से यह नजरिया नहीं अपनाना चाहिए। एक सरकार जो शासन करने से डरती है वह सरकार नहीं है। वह कर एकत्र करने के लिए बनाया गया एक निगम है। निस्सन्देह ब्रिटिश सरकार कर एकत्र करने के लिए नहीं बनाई गयी थी, उसे किसी अन्य प्रयोजन से बनाया गया था। वह एक सभ्य सरकार होने का दावा करती थी, तब इसने अन्याय को रोकने का कार्य क्यों नहीं किया? क्या इसका कारण यह था कि सरकार के पास शक्ति नहीं थी या इसका कारण यह था कि सरकार अपनी शक्ति का प्रयोग करने से डरती थी या उसका कारण यह था कि सरकार समझती थी कि भारत की सामाजिक और धार्मिक प्रथाओं में कोई दोष नहीं है। इसका उत्तर यह है