अछूत और ब्रिटिश सरकार - Page 135

120 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

कारण 1817 के विनियम-7 के प्रावधानों के अन्तर्गत दोनों इन मन्दिरों और मस्जिदों के प्रबन्ध राजस्व और धर्म दायों के निर्माण का काम सरकार के ईसाई अधिकारियों को इस प्रकार सौंपा गया है कि ईसाई पदाधिकारी की औपचारिक सहमति और आदेशों के बिना मूर्तिपूजा सम्बन्धी कोई महत्त्वपूर्ण धर्मक्रिया नहीं की जा सकती, विभिन्न मूर्तियों के किसी परिचारक यहाँ तक कि मन्दिर की वेश्याओं को न तो रखा जा सकता है और न ही बर्खास्त किया जा सकता है और न ही कोई खर्च किया जा सकता है। चौथाः अब ब्रिटिश अधिकारी भी सरकार की फौज के साथ गोला दाग कर सलामी देने, अन्यथा मुसलमानों के समारोहों में भाग लेने और मूर्तियों पर श्रद्धा-सुमन चढ़ाने के लिए नियुक्त किये जाते हैं। यहाँ तक कि विश्राम के दिन भी उन्हें इस काम पर लगाया जाता है। अतः सरकार ईसाइयों को बहुधा अपनी अत्यन्त पवित्र संस्थाओं को अपवित्र करने और तथा अपमानजनक अन्धविश्वासों में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं करती है।

यह दिखाने के लिए इतना काफी है कि भारत में ब्रिटिश सरकार, देव वाक्य के प्रचार का दमन करने के अपने प्रयासों से सन्तुष्ट न होने पर खुले और अधिकारिक रूप से निकृष्टतम किस्म की पिशाच पूजा की सहायता तथा समर्थन कर रहे थे। वे हिन्दू धर्म की घृणित अश्लीलताओं और वीभत्स क्रूरताओं को अपना विशेष संरक्षण प्रदान कर रहे थे, अपने विधिनायकों को नारकीय व्यभिचारों का संचालन करने के लिए भेज रहे थे, और पितृ सुलभ कोमलता के साथ मूर्ति मन्दिरों की सम्पत्ति की देखरेख कर रहे थे, पुजारियों को इस कदर सम्मान दे रहे थे कि वे खुशी से फूल-फूल कर मोटे हो रहे थे।य्

यह सिलसिला 1841 तक चलता रहा और 1841 में ही सरकार ने हिन्दुओं और मुसलमानों के धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेना बन्द किया और वह भी तब, जब ईसाई धर्म प्रचारकों ने काफी आन्दोलन किया।

सेंट जॉर्ज की सरकार के सैनिक सचिव द्वारा 6 जुलाई, 1841 को हस्तक्षेप और निदेशक मंडल के निदेशों के अन्तर्गत, भारत सरकार के माध्यम से प्रधान सेनापति को भेजे गये एक परिपत्र में यह सूचित किया गया कि देशी त्योहारों अथवा समारोहों में सैनिकों तथा सेना के बैंडों की उपस्थिति तथा इस प्रकार के अवसरों पर गोली दाग कर सलामी देने की प्रथा, भविष्य में बन्द की जाएगी, ताकि जहाँ तक हो सके सरकार और इसके अधिकारी हिन्दू और मुसलमान धर्मों के ऐसे अनुष्ठानों से दूर रहें। तथापि देशी राजाओं को ऐसे त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों में जाते समय और लौटते समय जो सम्मान दिया जाता है, वह दिया जाता रहेगा और यह परिवर्तन ऐसे ढंग से किया जाएगा कि मूल निवासियों के मन पर अथवा उनकी भावनाओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। ये आदेश प्रधान सेनापति द्वारा डिवीजनों की कमान रखने वाले जनरलों को भेजे गये और जनरलों द्वारा अपनी कमान के अन्तर्गत आने वाली रेजीमेंटों को भेजे गये।