अछूत और ब्रिटिश सरकार - Page 136

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एक ऐसी सरकार से जो देशी पूर्वग्रहों में इतनी तल्लीन हो गयी है और जो उन्हें बनाए रखने तथा उनकी रक्षा करने में ऐसे सरकारी संसाधनों को बर्बाद करती है, सुधार की क्या आशा की जा सकती थी? वह सहानुभूति से आक्रान्त और स्तंभित थी। जब पूर्वग्रहों के प्रति उसकी सहानुभूति समाप्त हो गयी, तो उस पर डर छा गया। इस डर के दो कारण थे। पहला कारण वे वादे थे जो उसने भारत के लोगों को दिये थे। किसी देशी राजा के अन्तर्गत नये राज्यक्षेत्र का शासन सम्भालने से पूर्व ब्रिटिश सरकार का यह घोषणा करने का दस्तूर था कि अपने धर्मों का आजादी से पालन करने में लोगों को संरक्षण प्रदान किया जाएगा और न ही उनकी संस्थाओं अथवा उनके रीति रिवाजों पर प्रहार किया जाएगा। इस प्रकार कर्नाटक के लोगों के लिए 1804 में निम्नलिखित शब्दों में एक विधिवत घोषणा की गयीµ फ्यद्यपि परिषद के गवर्नर का विश्वास है कि कर्नाटक के निवासियों को जो अनुभव हुआ है, उसको देखते हुए नियन्त्रण के लिए संयम, न्याय, संरक्षण और सुरक्षा के सामान्य सिद्धान्त स्पष्ट करना, जो ब्रिटिश सरकार के विशेषता सूचक लक्षण हैं, अनावश्यक हो गया है, फिर भी वर्तमान वचनबन्धों द्वारा कम्पनी को हस्तांतरित पवित्र उत्तरदायित्व को स्वीकार करते हुए ‘हिज लॉर्डशिप’ कर्नाटक के लोगों से माँग करते हैं कि वे कम्पनी के प्राधिकार को तुरन्त और खुशी से मान लें और उन्हें आश्वासन देते हैं कि सार्वजनिक कानूनों के अन्तर्गत उन्हें पूरी सुरक्षा प्रदान की जाएगी। उन्हें सभी नागरिक अधिकार प्राप्त होंगे और उन्हें अपनी धार्मिक प्रथाओं तथा पूर्वजों के रीति रिवाजों पर चलने की पूरी आजादी होगी।य्

मई 1834 में कुर्ग को जीतने के बाद वहाँ के लोगों के लिए निम्नलिखित उद्घोषणाएँ जारी की गयींः फ्कुर्ग के निवासियों की यह सर्वसम्मत आकांक्षा है कि उन्हें ब्रिटिश सरकार के संरक्षण में लिया जाये, अतः महामहिम माननीय गवर्नर जनरल ने यह निश्चय किया है कि अब तक जिस राज्यक्षेत्र पर वीर राजेन्द्र वुडयार का शासन था, उसे माननीय कम्पनी को हस्तांतरित कर दिया जाएगा। एतद्द्वारा निवासियों को आश्वस्त किया जाता है कि उन्हें पुनः देशीय शासन के अधीन नहीं लाया जाएगा और उनके नागरिक अधिकारों और धार्मिक रिवाजों का आदर किया जाएगा, और उनकी सुरक्षा, आराम और प्रसन्नता का अनिवार्य रूप से ब्रिटिश सरकार पूरा ध्यान रखेगी।य्

1849 में पंजाब को अपने राज्यक्षेत्र में मिला लेने के पश्चात वहाँ के लोगों को भी निम्नलिखित आश्वासन दिया गयाµ फ्ब्रिटिश सरकार सभी लोगों को, चाहे वे मुसलमान हों, हिन्दू हों, या सिक्ख हों, अपने-अपने धर्मों का आजादी से पालन करने की छूट देगी, लेकिन वह किसी एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति द्वारा ऐसे रीति-रिवाजों का पालन करने में बाधा डालने की अनुमति नहीं देगी, जिनकी उनके अपने-अपने धर्म अनुमति देते हैं।य् ऐसी अन्य घोषणाओं का भी उल्लेख किया जा सकता है। उन्हें प्रतिज्ञा समझा जाता था।