अछूत और ब्रिटिश सरकार - Page 138

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चीज सहन नहीं कर सकती थी, जिससे राष्ट्रवाद की बू आती हो। इसका कारण यह था कि ये सभी चीजें इसके स्वभाव के प्रतिकूल थीं। लेकिन एक गैर-जिम्मेदार सरकार जो चीजें करना चाहती है, वे भी नहीं कर सकती, क्योंकि बाहरी विरोध की सम्भावना के कारण इसका अधिकार सीमित हो जाता है। कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जो सरकार करना चाहती है, लेकिन करने का साहस नहीं करती, क्योंकि उसे डर होता है कि कहीं उसकी गद्दी के लिए खतरा न हो जाये। सीजर ने रोमन लोगों की पूजा बन्द करने की हिमाकत नहीं की। एक आधुनिक संसद आवश्यक समझने पर भी उपनिवेशों पर कर लगाने का साहस नहीं कर सकती। इसी कारण भारत सरकार जाति प्रथा को समाप्त करने का साहस नहीं कर सकी। एक बार शादी करने का नियम बनाने, उत्तराधिकारी कानूनों को बदलने, अन्तरजातीय शादियों को कानूनी करार देने या चाय बागानों के मालिकों पर कर लगाने का साहस नहीं कर सकी। प्रगति के लिए सामाजिक जीवन की वर्तमान नियमावली में दखल देना अनिवार्य है और दखल देने के विरोध होने की सम्भावना रहती है। फिर भी एक जनता की सरकार जो उनसे निर्लिप्त नहीं, प्रगति के पथ पर चलने का साहस कर सकती है क्योंकि वह यह जानने की स्थिति में होती है कि आज्ञा का पालन कहाँ तक होगा और कहाँ से विरोध आरम्भ होगा। लेकिन भारत की सरकार, जनता की सरकार न होने के कारण लोगों की नब्ज को न पहचान सकी। संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि गैर-जिम्मेदार कार्यपालिका जो भारत में सत्ता में थी, अपने अधिकारों पर इन दो सीमाओं के कारण कुछ करने में असमर्थ थी और जीवन को सुधारने के लिए जो बहुत कुछ किया जा सकता था, नहीं किया जा सका। कुछ काम तो वह करना नहीं चाहती थी, और कुछ कर नहीं सकती थी। इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि कुछ भौतिक प्रगति हुई। लेकिन विश्व में कोई भी व्यक्ति अधिक देर तक शान्ति और व्यवस्था से होने वाले लाभों से सन्तुष्ट नहीं रह सकता, क्योंकि वे गूँगे पशु नहीं हैं। यह कल्पना करना मूर्खता है कि कोई जाति अनिश्चित काल तक नौकरशाही का पक्ष लेगी, क्योंकि नौकरशाही उनकी सड़कों का सुधार करती है, अधिक वैज्ञानिक सिद्धान्तों के आधार पर नहरों का निर्माण करती है, उनके परिवहन के लिए रेलें बनाती है, डाक द्वारा उनके पत्रों को पहुँचाने की व्यवस्था करती है, बिजली की तरह उनके सन्देशों को पहुँचाती है, उनकी मुद्रा में सुधार लाती है, उनके नाप और तोल को नियमित करती है। भूगोल, विज्ञान और चिकित्सा शास्त्र के बारे में उनकी धारणा को ठीक करती है। कोई भी जाति कितनी ही धैर्यवान क्यों न हो, देर-सवेर एक ऐसी सरकार की माँग करेगी जो कुशल होने के अलावा कुछ और भी होगी।

जनता राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक स्वाधीनता चाहती थी जो ब्रिटिश सरकार ने देने से इंकार कर दियाµ फ्इसके परिणामस्वरूप जहाँ तक लोगों के नैतिक और सामाजिक जीवन का सम्बन्ध है, मुगलों की सरकार के स्थान पर अंग्रेजों की सरकार के आने से केवल शासक का परिवर्तन हुआ, शासन प्रणाली में कोई परिवर्तन नहीं