अछूत और ब्रिटिश सरकार - Page 139

124 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

हुआ। कुछ तो अपनी पसन्द और कुछ हद तक अपनी आवश्यकता के कारण अंग्रेजों ने हस्तक्षेप न करने का सिद्धान्त अपनाया, जिससे भारत के मूल निवासियों ने पाया कि अंग्रेजों की सरकार किसी महत्त्वपूर्ण दृष्टि से उन सरकारों से भिन्न नहीं है, जिनके अधीन वे पुराने और विस्मृत इतिहास के समय से कठिन परिश्रम करते आये हैं और जीते-मरते रहे हैं। राजनैतिक दृष्टि से इस परिवर्तन का अर्थ केवल एक तानाशाह के स्थान पर दूसरे तानाशाह का आना था। अंग्रेजों ने वही व्यवस्था स्वीकार कर ली, जो इसे मुगलों से मिली और उसे ज्यों-का-त्यों बनाये रखा। ख्1, जैसे कि चीन के दर्जी करते हैं। जब चीन के दर्जी को कोई कोट सिलाई के लिए दिया जाता है, और साथ में कोई नमूना दिया जाता है, तो वे हूबहू उसी प्रकार का दूसरा कोट बना देते हैं। अंग्रेजों ने भी ठीक ऐसा ही किया।’’2 हस्तक्षेप न करने की यह नीति बोधगम्य थी लेकिन जहाँ तक अछूतों का सम्बन्ध है, इसकी धारणा गलत थी और इसके परिणाम गम्भीर रहे। यह सही माना जा सकता है कि हिन्दू, अछूतों के मानव अधिकारों को मान्यता दें और उन्हें मानव समझें तो अछूतों का उद्धार हो सकता है। लेकिन इससे मामला समाप्त नहीं हो जाता। प्रश्न यह रहता है कि मानव के रूप में अछूतों के अधिकारों को मान्यता कैसे दी जाएगी? इस उद्देश्य को प्राप्त करने के केवल दो तरीके हैं। एक तरीका यह है कि उसे आदर योग्य बनाया जाये और दूसरा तरीका यह है कि उन लोगों को दंड दिया जाये जो उसका निरादर करते हैं और उसे उसके अधिकारों से वंचित करते हैं। पहले तरीके के अन्तर्गत उसे शिक्षित करना होगा और उसे अधिकार वाले पदों पर बिठाना होगा। दूसरे तरीके के अन्तर्गत छुआछूत को एक दंडनीय अपराध मानना होगा और इस प्रकार समाज सुधार करना होगा। ब्रिटिश सरकार इनमें से कोई भी तरीका अपनाने को तैयार नहीं थी। ब्रिटिश सरकार अछूतों को सरकारी सेवा में प्राथमिकता भी देने के लिए तैयार नहीं थी। ब्रिटिश सरकार हिन्दू समाज में सुधार लाने के लिए भी तैयार नहीं थी, इसका परिणाम यह हुआ कि अछूत अंग्रेजों से पहले भी अछूत थे और अंग्रेजों के बाद भी अछूत रहे। अछूत एक नागरिक था लेकिन उसे एक नागरिक के अधिकार नहीं दिये जाते थे। वह कर देता था जिससे विद्यालयों का रख-रखाव किया जाता था, लेकिन उसके बच्चों को उन विद्यालयों में दाखिला नहीं मिल सकता था। वह जो कर देता था उससे कुएँ बनते थे, लेकिन उन्हें उन कुँओं से पानी लेने का कोई अधिकार नहीं था। वह जो कर देता था उनसे सड़कें बनती थीं लेकिन उन्हें उनका प्रयोग करने का अधिकार नहीं था। वह राज्य के अनुरक्षण के लिए करों का भुगतान करता था, लेकिन उसे राज्य में पद ग्रहण

  1. बर्मा में मतदान-कर, केवल इसलिए जारी रखा गया, क्योंकि वह वहाँ उसे जीतने से पहले से लागू

था।

  1. बर्नार्ड हाफरन, ब्यूरोक्रेटिक गवर्मेंट