(i) अंग्रेजी संविधन के आधरभूत सिद्धान्त - Page 145

130 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

सिद्धान्त को उसके बाद बने हर नये संविधान का आधार माना गया है। यह इस बात का एक दिलचस्प उदाहरण है कि राजनीति शास्त्र के एक छात्र के गलत निष्कर्षों से देश किस प्रकार गुमराह हो गये क्योंकि इसमें कोई सन्देह नहीं है कि मोन्टेस्क्यू ने अंग्रेजी संविधान को गलत समझा। अंग्रेजी संविधान निश्चित रूप से शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धान्त को मान्यता नहीं देता। राजा विधानमंडल का एक अंग है। न्यायपालिका का प्रमुख है और देश की सर्वोच्च कार्यपालिका शक्ति है। मन्त्री जो राजा के नाम से देश की कार्यपालिका सरकार चलते हैं, वे संसद के सदस्य होते हैं। इस प्रकार कार्यपालिका और विधायिका अलग-अलग नहीं हैं। लार्ड चांसलर न्यायपालिका का कार्यकारी प्रमुख है। वह मंत्रिमंडल का भी सदस्य होता है। इस प्रकार कार्यपालिका और न्यायपालिका भी अलग-अलग नहीं हैं। राज्य के तीन अंग ही अलग-अलग नहीं हैं, बल्कि इस बयान की भी कोई बुनियाद नहीं है कि उनकी शक्ति संविधान के अन्तर्गत सीमित है क्योंकि अमरीका के लोग इस शब्द का जो अर्थ लेते हैं उस दृष्टि से यह कोई संविधान नहीं है क्योंकि इसमें न तो राज्य के विभिन्न अंगों के कृत्यों का आवंटन किया गया है और न ही उनकी शक्ति का सीमांकन किया गया है। अंग्रेजी संविधान के अन्तर्गत कानून के अनुसार एक सर्वोच्च सत्ता है और वह है संसद। यदि कार्यकारिणी और न्यायपालिका के कृत्य सीमित हैं तो इसका अर्थ यह नहीं है कि संसद के कृत्य आवंटित किये गये हैं जो कुछ संस्थाओं द्वारा एक खास तरीके से पूरे किये जाएँगे। न्यायपालिका और कार्यपालिका की सीमाएँ होने से संसद की शक्तियाँ सीमित नहीं हो जातीं। दूसरी ओर इनकी शक्तियाँ संसद सीमित करती है, अतः संसद को शक्तियाँ बढ़ाने अथवा कम करने का अधिकार है।

संसद की विधायी सर्वोच्चता का अर्थ

संसद की विधायी सर्वोच्चता को पूरी तरह समझने के लिए इसके दो कर्तव्यों को समझना आवश्यक है। पहला यह है कि अंग्रेजी संवधान के अनुसार संसद को कोई भी कानून बनाने अथवा खत्म करने का अधिकार है। दूसरे किसी भी व्यक्ति या व्यक्तियों की संस्था को इंग्लैंड के कानून के अनुसार संसद द्वारा बनाये गये कानून को रद्द करने अथवा समाप्त करने का कोई अधिकार नहीं है। यह याद दिलाना आवश्यक है कि संसद और कानूनी शब्दों का कानूनी दृष्टि से सही अर्थ लगाया जाना चाहिए। जैसा कि पहले बताया गया है, संसद का अर्थ राजा, लार्ड्स और जनता है और इनमें से कोई भी व्यक्तिगत रूप से इस शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकता। अतः संसद का कोई अधि नियम बनाने के लिए सभी को संयुक्त रूप से अपनी शक्ति का प्रयोग करना होता है। कानून शब्द का भी कानूनी दृष्टि से सही अर्थ समझ लेना चाहिए। इससे केवल ऐसे नियम अभिप्रेत हैं जो न्यायालयों द्वारा लागू किये जाते हैं। संसद की विधायी सर्वोच्चता का सिद्धान्त स्पष्ट हो जाने के पश्चात हम यह पूछ सकते हैं कि संसद की इस विधायी सर्वोच्चता का प्रमाण क्या है?