(i) अंग्रेजी संविधन के आधरभूत सिद्धान्त - Page 148

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सत्ता हड़पने का यह कानून एक वैध कानून था। यह दिखाने के लिए विधायी दृष्टि से संसद सर्वोच्च थी, भूतकाल में इतनी दूर जाना और सप्तवर्षीय अधिनियम उद्धृत करना अनावश्यक भी है। पर विधायी सर्वोच्चता के बारे में एक ऐसा प्रयोग संसद द्वारा पिछले युद्ध के दौरान भी किया गया था, जब 1914 में विद्यमान संसद ने संसद को भंग करने के बजाय, उसका कार्यकाल बढ़ाने के लिए एक अधिनियम पारित कर दिया था।

क्षतिपूर्ति अधिनियम µ ये ऐसे उदाहरण है जो निरन्तर होते रहते हैं और जो संसद की विधायी सर्वोच्चता के बारे में याद दिलाने का काम करते हैं। क्षतिपूर्ति अधिनियम एक ऐसा कानून है जिसका उद्देश्य उन पर कानून के अन्तर्गत लगाये गये दंडों से उन्हें मुक्त कराना है। संसद की विधायी सर्वोच्चता का यह सबसे बड़ा प्रमाण है, क्योंकि इसका अर्थ एक अवैध कार्य को वैध बनाना है।

निजी अधिकारों में हस्तक्षेप

अधिकांश विधान सभाएँ आम जनता के अधिकारों को नियमित करने तक अपनी विधायी शक्तियाँ सीमित रखती हैं। निजी अधिकारों और घरेलू अधिकारों को इतना विशिष्ट और पवित्र समझा जाता है कि संसद उनमें हस्तक्षेप नहीं करती। लेकिन ब्रिटिश संसद ने अपनी विधायी शक्ति पर इन सीमाओं को स्वीकार नहीं किया है। ड्यूक ऑफ क्लेरेंस और क्लोसेस्टर जब जीवित थे तो भी संसद ने एक अधिनियम बनाकर यह घोषणा कर दी कि उनकी पुत्रियों और पत्नियों को उनकी सम्पत्ति विरासत में मिलनी चाहिए। जहाँ तक ड्यूक ऑफ बकिंघम का सम्बन्ध है, वह नाबालिग था लेकिन संसद ने एक अधिनियम बना दिया जिसमें यह घोषणा कर दी थी कि उसे सभी विधिक प्रयोजनार्थ बालिग समझा जाये। सर रोबर्ट प्लेफिन्स्टन की मृत्यु हो गयी थी, फिर भी उसकी मृत्यु के बहुत दिन पश्चात संसद ने एक कानून पारित किया, जिसमें उसे राजद्रोह का अपराधी माना गया था। मैन्चैस्टर के मारकिन्स का मामला एक ऐसा उदाहरण है, जिसमें संसद ने कानून के द्वारा एक जायज बच्चे को नाजायज घोषित कर दिया। इसका एक विपरीत उदाहरण भी है, जिसमें शादी से पूर्व पैदा हुए नाजायज बच्चे को जायज घोषित किया गया। इस मामले का सम्बन्ध संसद द्वारा पारित उस कानून से है, जो जोहन ऑफ गौंट, ड्यूक ऑफ लानकेस्टर के साथ सम्बन्धों के कारण कैथरीन स्विनफोर्ड द्वारा पैदा हुए बच्चों के बारे में बनाया गया। ड्यूक के साथ सम्बन्धों के कारण कैथरीन के शादी से पूर्व चार नाजायज बच्चे हैनरी, जोहन, थॉमस और एक लड़की जोन हुए। राजा ने चार्टर के रूप में संसद के एक कानून द्वारा इन बच्चों को जायज बना दिया। इन उदाहरणों से स्पष्ट हो जाता है कि संसद कानून बनाकर न केवल एक व्यक्ति के प्रेम सम्बन्ध को नियमित कर सकती है, बल्कि सामान्य कानून की दिशा भी बदल सकती है।