II
अध्याय - I
संसद क्या है?
इन दिनों बहुत से लोग संसद का अर्थ हाउस ऑफ कॉमन्स लगाते हैं। इसमें हाउस ऑफ लॉर्ड्स और निश्चित रूप से राजा सम्मिलित नहीं हैं। इस जनधारणा का मुख्य कारण यह है कि हाउस ऑफ कॉमन्स अंग्रेजी संविधान के कार्यविधि में बहुत ही प्रमुख तत्त्व बन गया है। लेकिन यह धारणा कितनी ही न्यायसंगत क्यों न हो कानून की दृष्टि से यह गलत धारणा है। कानूनी तौर पर संसद के तीन घटक तत्त्व हैंµ राजा, हाउस ऑफ लॉर्ड्स, और हाउस ऑफ कॉमन्स। हर प्रकार की विधायी शक्ति, संयुक्त रूप से राजा, हाउस ऑफ लॉर्ड्स और हाउस ऑफ कॉमन्स के पास है। यह संसद में, राजा के पास निहित है अर्थात उस राजा के पास होती है जो संसद की दोनों सभाओं की सहमति से कार्य करता है। कानूनी तौर पर कोई भी अधिनियम राजा की सहमति के पश्चात ही देश का कानून बन सकता है। संसद के गठन में राजा कितना महत्त्वपूर्ण कारक है यह बात इस तथ्य को ध्यान में रखने से स्पष्ट हो जाएगी कि राजा द्वारा आमन्त्रित किये जाने पर ही संसद की दोनों सभाएँ अपना कार्य कर सकती हैं। वे अपने आप बैठक नहीं बुला सकतीं और अपना कार्य नहीं कर सकतीं। राजा का स्थान कितना महत्त्वपूर्ण है यह इस बात से भी स्पष्ट हो जाएगा कि यह याद रखा जाये कि संसद की सभाओं को आमन्त्रित करने, सत्रों का अवसान करने और सभाओं का विघटन करने की शक्ति, राजा में निहित है और उसके प्रसादपर्यन्त किसी समय इसका प्रयोग किया जा सकता है। दूसरी ओर, सामान्यतया यह सही है कि संसद की दोनों सभाओं की सहमति के बिना राजा को इंग्लैंड में किसी प्रकार का कोई विधान बनाने की शक्ति प्राप्त नहीं है। राजा का कोई भी निर्णय हाउस ऑफ कॉमन्स और हाउस ऑफ लॉर्ड्स की सहमति के बिना कानून नहीं बन सकता जब तक कि किसी अन्य संविधि द्वारा उसे उपबन्धित न किया जाये।
यह कथन कि समस्त विधायी शक्ति संसद द्वारा राजा में निहित है और राजा हाउस ऑफ लॉर्ड्स और हाउस ऑफ कॉमन्स की सहमति के बिना कोई कानून पारित नहीं कर सकता, निम्न दो शर्तों के अधीन हैµ
(1) राजा का निषेधाधिकार (वीटो)µ फ्यद्यपि कानून के अनुसार किसी भी प्रक्रिया से कानून बनने से पूर्व उस पर राजा की सहमति प्राप्त करना आवश्यक है, सहमति देने से इंकार करने की उनकी शक्ति, अर्थात उनका वीटो करने का अधिकार उसके दुरुपयोग के कारण असीम हो गया है। पर रानी एने के समय से वीटो के अधिकार का प्रयोग नहीं किया गया है। उन्होंने 1707 के स्काच मिलीशिया विधेयक को स्वीकृति देने से मना कर दिया था। राजा/रानी द्वारा वीटो की उस शक्ति की क्षति विधिक क्षति नहीं है। कानून में उसकी वीटो की शक्ति बिना किसी शर्त के हर मामले में लागू की जा सकती