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है। यह सहनशीलता के कारण है जिसका आधार एक परम्परा है जिसके अनुसार यह तय कर लिया जाता है कि जब दो सदन सहमत हो जाते हैं तो राजा/रानी को अपनी स्वीकृति देने से इंकार नहीं करना चाहिए। इसका प्रयोग न करने का अर्थ यह नहीं है क इसका कभी प्रयोग किया ही नहीं जा सकता। मान लें एक मंत्रिमंडल हाउस ऑफ कॉमन्स द्वारा एक विधेयक पारित होने के पश्चात त्याग पत्र दे देता है और हाउस ऑफ लॉर्ड्स नये मंत्रिमंडल के विरोध के बावजूद विधेयक पारित करने पर बल देता है, तो यह कहना अविवेकपूर्ण होगा कि ऐसे मामले में राजा या रानी अपनी स्वीकृति देने से इंकार नहीं करेगा, चाहे दोनों सदनों ने विधान बनाने की सहमति दे दी हो।
(2) हाउस ऑफ लॉर्ड्स का निषेधाधिकार (वीटो)µ हाउस ऑफ लॉर्ड्स पहले हाउस ऑफ कॉमन्स के बराबर था और इसके पहले कि कोई प्रक्रिया संसद का अधिनियम बने, उस पर हाउस ऑफ कॉमन्स की तरह, हाउस ऑफ लॉर्ड्स की सहमति प्राप्त करना आवश्यक था। यद्यपि कानून के अनुसार यह स्थिति थी, व्यवहार में हाउस ऑफ कॉमन्स ने वित्त के मामलों में अनन्य अधिकार ग्रहण कर लिया था और अन्य विधानों के मामलों में भी अवहेलना का अधिकार प्राप्त कर लिया था। 1671 में हाउस ऑफ कॉमन्स ने निम्नलिखित प्रस्ताव पारित कियाµ फ्अगर हाउस ऑफ कॉमन्स द्वारा राजा को कोई कर प्रस्ताव दिये जाते हैं, तो हाउस ऑफ लॉर्ड्स को कर की दर में कोई परिवर्तन नहीं करना चाहिए।य् 1676 में हाउस ऑफ कॉमन्स ने एक और प्रस्ताव स्वीकृति किया जो इस प्रकार हैµ फ्अनुदान प्रदान करने सम्बन्धी सभी विधेयक हाउस ऑफ कॉमन्स में ही पुंनः स्थापित किये जाने चाहिए और निश्चित रूप से सीमा बाँधना और ऐसे विधेयकों के उद्देश्य, प्रयोजन, शर्तें, सीमाएँ आदि निर्धारित करना केवल हाउस ऑफ कॉमन्स का अधिकार है जिसमें हाउस ऑफ लॉर्ड्स को कोई परिवर्तन नहीं करना चाहिए।य्
गैर-वित्तीय किस्म के साधारण विधान में हाउस ऑफ कॉमन्स ने दावा किया कि यद्यपि हाउस ऑफ लॉर्ड्स एवं हाउस ऑफ कॉमन्स से मतभेद हो सकता है, फिर भी जब दोनों सदनों के बीच मतभेद होता है तो हाउस ऑफ लॉर्ड्स को हर स्थिति में हाउस ऑफ कॉमन्स का दावा स्वीकार कर लेना चाहिए। हाउस ऑफ लॉर्ड्स ने स्पष्ट रूप से यह बात कभी स्वीकार नहीं की है, हालांकि व्यवहार में हाउस ऑफ लॉर्ड्स इसका पालन करते हैं। यह प्रथा केवल राजनैतिक सूझबूझ का मामला है। यह एक परम्परा है और इसे विधि का रूप नहीं दिया गया है। कानून के अनुसार हाउस ऑफ लॉर्ड्स को वीटो की शक्ति थी अर्थात हाउस ऑफ लॉर्ड्स किसी वित्तीय या गैर-वित्तीय प्रक्रिया में सहमति देने से इंकार कर सकता था। यह भी शक्ति की कानूनी क्षति का मामला नहीं था। यह इसके प्रयोग में सहनशीलता का मामला था। 1910 में प्रथा के प्रतिकूल हाउस ऑफ लॉर्ड्स ने श्री लॉयड जॉर्ज के बजट में वित्तीय प्रस्तावों की सहमति देने से इंकार करने के अपने अधिकार का प्रयोग करने पर बल दिया। इससे हाउस ऑफ कॉमन्स