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तो विधेयक तीसरी बार हाउस ऑफ लार्ड्स द्वारा अस्वीकृत होने पर, यदि हाउस ऑफ कामन्स कोई प्रतिकूल निर्देश नहीं देता, महामहिम को प्रस्तुत किया जाएगा और राजा की स्वीकृति मिल जाने पर वह संसद का कानून बन जाएगा। चाहे हाउस ऑफ लार्ड्स ने उस विधेयक पर सहमति न भी दी हो। परन्तु यह प्रावधान हाउस ऑफ कामन्स के इन सत्रों के पहले सत्र में विधेयक के दूसरे पाठन की तारीख और हाउस ऑफ कॉमन्स द्वारा उन सत्रों के तीसरे सत्र में पारित करने की तारीख के बीच दो वर्ष बीतने तक लागू नहीं होगा।
1911 के संसद के कानून के ये मुख्य प्रावधान हैं। इन्होंने एक धन विधेयक को छोड़कर अन्य सरकारी विधेयक के सम्बन्ध में उस वीटो का चरित्र बदल दिया है और उसे केवल एक विलम्बकारी वीटो बना दिया है जो निर्धारित अवधि के दौरान हाउस ऑफ कॉमन्स द्वारा पारित विधान को केवल रोकने का प्रभाव रखता है। विधान रोकने की शक्ति जो संसद के बराबर सदस्य होने के नाते कभी हाउस ऑफ लार्ड्स को भी प्राप्त थी, अब इस कानून ने छीन ली है।
राजा और लार्डों के प्राधिकार के बारे में इन परम्पराओं और कानूनी कटौतियों के अध्याधीन यह कथन कि संसद के अन्तर्गत राजा (या रानी) हाउस ऑफ लार्ड्स और हाउस ऑफ कॉमन्स आते हैं और उनकी सहमति के बिना कोई विधेयक कानून नहीं बन सकता, आज भी उतना ही सत्य है, जितना कि यह 1911 के अधिनियम से पूर्व था।
III
अध्याय - II
राजसिंहासन
राजा का सिंहासन पर अधिकारµ 1688 के प्रस्ताव से पूर्व, जब जेम्स द्वितीय देश से भाग गया तो यह निश्चित नहीं था कि राजा को सिंहासन का दावा करने का क्या अधिकार है? क्या वह पुश्तैनी है या निर्वाचित। लेकिन इसमें कोई सन्देह नहीं है कि उसके पश्चात राजसिंहासन पर अधिकार एक संसदीय अधिकार बन गया है, क्योंकि संसद राजसिंहासन पर आरोहण में परिवर्तन कर सकती है। इस समय राजसिंहासन पर आरोहण का अधिकार वर्ष 1701 में पारित व्यवस्थापित अधिनियम के प्रावधानों द्वारा विनियमित होता है। इस अधिनियम के द्वारा राजसिंहासन पर आरोहण का अधिकार विलयम और उसकी पत्नी मेरी तथा उनकी मृत्यु होने पर, उसके वारिसों को दिया गया था। इस अधिकार से दो शर्तें जुड़ी हुई हैं। पहला µ उत्तराधिकारी एक वारिस, पुरुष या नारी, होना चाहिए और दूसरा µ उत्तराधिकारी धर्म से प्रोटेस्टेंट ईसाई हो।
राजसिंहासन के अधिकार और कर्तव्यµ राजा के या तो सांविधिक अधिकार होते हैं या विशेषाधिकार होते हैं। सांविधिक अधिकार वे अधिकार हैं जो राजा को