(iii) राजसिंहासन - Page 153

138 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

संसद के कानून द्वारा दिये जाते हैं। विशेषाधिकार राजा के परम्परागत या सामान्य विधि अधिकार होते हैं, जिनका वह प्रयोग करता रहा है और जो कानून द्वारा छीने नहीं गये हैं। राजा के सांविधिक अधिकारों और कर्तव्यों के मामले में ऐसा जरूरी नहीं है क्योंकि उनकी सही परिभाषा की जा सकती है और जिस संविधि से वे उद्भूत हुए हैं उनका हवाला देकर उनका पता लगाया जा सकता है। दूसरी ओर, किसी संविधि का सन्दर्भ देकर विशेषाधिकार किसी संविधि से उद्भूत नहीं होते। राजा के विशेषाधिकार परम्परागत अधिकार हैं और संविधि से उनका कोई सम्बन्ध नहीं है और अन्य सभी परम्परागत अधिकारों की भाँति उनके स्वरूप और विस्तार की जाँच, जब कभी उनका दावा किया जाता है, विधि न्यायालय द्वारा की जाती है। राजा के विशेषाधिकारों पर निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत चर्चा की जा सकती हैµ

(क) व्यक्तिगत विशेषाधिकार

  1. राजा कोई गलती नहीं कर सकताµ सभी काम राजा के नाम से किये जाते हैं, लेकिन इस विशेषाधिकार की वजह से राजा अपने किसी काम के लिए जिम्मेदार नहीं है। राजा के रूप में उसकी ओर से जो काम किये जाते हैं, उनके लिए उसके मंत्री जिम्मेदार हैं। अतः राजा द्वारा जो कार्यपालिका सम्बन्धी काम किये जाते हैं उनके लिए उस पर कोई मुकदमा नहीं चलाया जा सकता अथवा उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। जब किसी व्यक्ति को संविदा भंग होने के कारण कोई हानि होती है तो वह राजा पर मुकदमा नहीं चला सकता, और न ही वह कोई अन्याय होने पर राजा पर मुकदमा चला सकता है। इस नियम की कठोरता को कम करने के लिए विशेष प्रावधान किया गया है जो सही प्रक्रिया की याचिका के नाम से प्रसिद्ध है। इसके अन्तर्गत एक अपकृत नागरिक क्षतिपूर्ति के लिए राजा को याचिका दे सकता है और वह याचिका अटार्नी जनरल द्वारा जो राजा का विधि अधिकारी होता है, न्याय देने का आदेश जारी करने पर वादयोग्य हो जाएगी और तभी न्यायालय एक मुकदमे में इसे अर्जीदावा मानकर याचिका पर कार्यवाही कर सकेगा। फिर भी कुछ ऐसे नियम हैं जो यद्यपि प्राइवेट पक्षकारों पर बाध्यकारी हैं परन्तु राजा पर बाध्यकारी नहीं होंगे। उदाहरण के तौर पर यह एक नियम है कि राजा संविदा करके अपने भावी कार्यपालिका कृत्यों में बाधा नहीं डाल सकता है। अतः राजा कभी भी, अपने किसी सेवक को बर्खास्त कर सकता है, फिर चाहे संविदा की अवधि कितनी भी हो, क्योंकि ऐसी संविदा से राजा की भावी कार्यपालिका कृत्य में बाधा आएगी। फलतः राजा का कोई सेवक अधिकार की याचिका द्वारा भी गलत बर्खास्तगी के लिए क्षतिपूर्ति करने हेतु राजा पर मुकदमा नहीं चला सकता।

2 . राजा की कभी मृत्यु नहीं होतीµ राजा में अमरत्व का गुण है। ताज पहनने वाले किसी एक व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है। लेकिन राजा जीवित रहता है। शासन