(iii) राजसिंहासन - Page 155

140 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

लेकिन अब राजा का यह विशेषाधिकार खत्म हो गया है। राजा कभी कोई न्यायालय बना सकता था और उसे किसी मामले या मुकदमे की सुनवाई करने का अधिकार दे सकता था। चार्ल्स द्वारा स्टार चैम्बर और कोर्ट ऑफ हाई कमीशन की स्थापना इस बात का एक उदाहरण है कि राजा का न्यायिक विशेषाधिकार कितना व्यापक था। लेकिन राजा का यह विशेषाधिकार भी अब समाप्त हो चुका है। राजा अब विशेषाधिकार द्वारा अर्थात संसद की स्वीकृति के बिना सामान्य कानून लागू करने के लिए ही न्यायालय बना सकता है। इस बचे हुए विशेषाधिकार का भी वह अब प्रयोग नहीं कर सकता, क्योंकि ऐसा करने पर वित्तीय विधान बनाना आवश्यक होगा जिसके लिए संसद की स्वीकृति लेना उसके लिए आवश्यक हो जाएगा। अब उसके केवल चार न्यायिक विशेषाधिकार रह गये हैंµ (1) वह सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने की अनुमति दे सकता है। (2) वह न्यायाधीशों की नियुक्ति कर सकता है। (3) वह एक अपराधी को क्षमा कर सकता है। (4) वह गवाही देने से इंकार करके अथवा एक औपचारिक ‘ग्रोट प्रासू’ में सम्मिलित होकर एक अपराधी के अभियोजन का दावा कर सकता है।

जहाँ तक राजा के विधायी विशेषाधिकारों का सम्बन्ध है, कभी ये अधिकार बहुत व्यापक थे, कभी राजा के इतने अधिकार थे कि वह संसद के बिना कानून बना सकता था, विशेष मामलों में कानून निलंबित कर सकता था और सामान्यतया उन्हें समाप्त कर सकता था। अब स्थिति बदल गयी है। अब संसद द्वारा बनाये गये कानूनों को निलंबित करने तथा उन्हें समाप्त करने का अधिकार उनके पास नहीं रहा। राजा के उपनिवेशों को छोड़कर अन्य मामलों में विधान बनाने का अधिकार भी राजा के पास नहीं रहा। राजा के पास जो विधायी विशेषाधिकार रह गये हैं वे हैंµ (1) संसद को आमन्त्रित करने, (2) संसद का सत्रावसान करने, (3) संसद भंग करने के विशेषाधिकार।

दो अन्य प्रकार के विशेषाधिकार हैं जो देश के आन्तरिक प्रशासन के बारे में हैं। विदेशी मामलों से सम्बन्धित अन्य प्रकार के विशेषाधिकारों पर विचार करने से पूर्व, इनका उल्लेख आवश्यक है।

चर्च सम्बन्धी विशेषाधिकारµ राजा कानून के अनुसार इंग्लैंड के चर्च का सबसे बड़ा अधिकारी है। चर्च का अध्यक्ष होने के नाते वह प्रधानमन्त्री की सिफारिश पर, आर्चबिशप, बिशप तथा चर्च के कतिपय अन्य अधिकारियों की नियुक्ति करता है। अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए राजा, सभा के दोनों सदनों को आमन्त्रित करता है। उनका सत्रावसान करता है और उन्हें भंग करता है। अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए राजा चर्च न्यायालयों के निर्णयों के विरुद्ध उच्चतम न्यायालय में अपील करने की अनुमति भी प्रदान कर सकता है।