(iii) राजसिंहासन - Page 157

142 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

समझे, युद्ध अथवा शान्ति स्थापित कर सकता है। यह भी राजा का विशेषाधिकार है। राजा को किसी दूसरे राष्ट्र से सन्धि करने का अधिकार है। यह सन्धि राजनैतिक अथवा वाणिज्यिक सन्धि हो सकती है। यह उसका विशेषाधिकार है। राजा के सन्धि करने के विशेषाधिकार पर केवल यह प्रतिबन्ध है कि वह विधि द्वारा नागरिकों को दिये गये अधिकारों को किसी तरह प्रभावित न करे।

राजा के विशेषाधिकार के प्रश्न के सम्बन्ध में कुछ प्रश्न उत्पन्न होते हैं और उनकी उपेक्षा करके उन पर विचार न करना वांछनीय नहीं होगा। पहला प्रश्न यह है कि राजा के विशेषाधिकारों का संसद के अधिकारों से ठीक-ठीक क्या सम्बन्ध है? दूसरा प्रश्न यह है कि अगर राजा अपने विशेषाधिकार या अन्य सांविधिक अधिकारों का प्रयोग करने के अयोग्य हो जाता है तो क्या होता है? पहले प्रश्न पर विचार करते समय यह समझ लेना आवश्यक है कि जब यह कहा जाता है कि राजा को यह या वह या कोई अन्य कार्य करने का अधिकार है तो इसका ठीक-ठीक क्या अर्थ होता है? इस अभिव्यक्ति से क्या अभिप्रेत है कि जब राजा अपने विशेषाधिकार के अनुसार कार्य करता है, तो उसे संसद की स्वीकृति लेने की आवश्यकता नहीं होती। उसे अपना अधिकार जन्म से मिला है और संसद के क्षेत्राधिकार से बाहर है। लेकिन यद्यपि यह सही है कि राजा की विशेषाधिकार की शक्ति जन्मजात है और संसद के क्षेत्राधिकार से बाहर है परन्तु इससे यह नहीं मान लिया जाना चाहिए कि इस कारण वह संसद के नियन्त्रण से बाहर है। दूसरी ओर, राजा की विशेषाधिकार की शक्ति का संसद द्वारा विनियमन संशोधन अथवा निरसन किया जा सकता है। इस प्रकार सही स्थिति यह है कि राजा के पास विशेषाधिकार की शक्ति तब तक रहती है जब तक संसद कानून बनाकर उसमें हस्तक्षेप नहीं करती। मान लो कि कोई विशेषाधिकार का मामला है और संसद द्वारा बाद में कानून बनाकर उसे नियमित किया जाता है, तो राजा अपनी विशेषाधिकार शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकेगा, लेकिन उस कानून के अन्तर्गत काम कर सकता है जिसने विशेषाधिकार का स्थान लिया है। अतः जहाँ तक पहले प्रश्न का सम्बन्ध है, निष्कर्ष यह है कि राजा का विशेषाधिकार तब तक उसके लिए स्वतन्त्र शक्ति का स्रोत है, जब तक कि संसद उसके अस्तित्व में हस्तक्षेप नहीं करती।

राजा अपने विशेषाधिकार तथा सांविधिक अधिकारों का प्रयोग करने के अयोग्य हो जाये तो क्या होता है? अब यह बेकार का प्रश्न नहीं है क्योंकि राजसी कार्यालय से कुछ महत्त्वपूर्ण कर्तव्य जुड़े हुए हैं और राजा उनका निर्वहन करने के अयोग्य हो सकता है। अयोग्यता की चार सम्भावनाओं की कल्पना की जा सकती है। (1) राजा अपने राज्य से अनुपस्थित हो सकता है। (2) राजा अवयस्क हो सकता है। (3) राजा पागल हो सकता है। (4) राजा, नैतिक दृष्टि से अयोग्य हो सकता है।

राजा की राज्य से अनुपस्थिति से कोई बहुत बड़ी कठिनाई नहीं हो सकती। संचार