(iv) उच्च सदन (हाउस ऑफ लॉर्ड्स) - Page 159

144 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

करने का अधिकार था और यह तभी सम्भव था जब पुरानी संसद भंग हो और नये राजा को नयी संसद के आमन्त्रित करने का अधिकार हो। इस नियम में पहली बार विनियम तीन द्वारा अध्याय 15 में संशोधन करके परिवर्तन किया गया और यह प्रावधान किया गया कि राजा की मृत्यु के पश्चात उसके उत्तराधिकारी द्वारा संसद को तुरन्त भंग कर दिया जाता तो संसद छः महीने के लिए काम करेगी। तत्पश्चात 1867 में (30, 31 विक्टोरिया, अध्याय दो, 102) इस नियम को बिल्कुल रद्द कर दिया गया और संसद के कार्यकाल का राजा की मृत्यु से कोई सम्बनध नहीं रहा।

2. पदावधि पर

मूल नियम यह था कि सभी कार्यकारी अधिकारियों को राजा की मृत्यु पर अपने कार्यालय खाली करने होते थे। यही कारण है कि राजा की मृत्यु पर संसद भंग हो जाती थी। इस मामले में भी कानून ने सिद्धान्त को धीरे-धीरे बदल दिया है 1707 के राजसिंहासन पर आरोहण अधिनियम द्वारा कार्यपालिका के अधिकारियों का कार्यकाल बढ़ाकर राजा की मृत्यु के पश्चात छः महीने तक कर दिया गया। बाद में पारित एक और अधिनियम द्वारा अवधि पुनः बढ़ाई गयी और अन्ततः 1901 के राजा की मृत्यु अधिनियम के अन्तर्गत पदावधि का, राजा की मृत्यु से सम्बन्ध समाप्त कर दिया गया।

IV

अध्याय - III

हाउस ऑफ लॉर्ड्स

हाउस ऑफ लॉर्ड्स में तीन विभिन्न वर्गों के अभिजात होते हैंµ 1. इंग्लैंड और यू.के. के पुश्तैनी अभिजात, 2. प्रतिनिधि अभिजात तथा 3. पदेन अभिजात। हाउस ऑफ लॉर्ड्स के गठन को समझने के लिए सर्वप्रथम जो प्रश्न उठाया जाना चाहिए और जिसका उत्तर दिया जाना चाहिए वह है कि अभिजातों को हाउस ऑफ लॉर्ड्स में बैठने का क्या हक है?

इंग्लैंड और युनाइटेड किंगडम के अभिजात

इंग्लैंड और युनाइटेड किंगडम के अभिजातों को हाउस ऑफ लॉर्ड्स में बैठने का हक इसलिए है क्योंकि राजा प्रत्येक अभिजात को आने और संसद में उपस्थित होने के लिए अलग-अलग निमन्त्रण पत्र भेजता है। इंग्लैंड के अभिजात वर्ग की स्थापना राजा द्वारा अधिकार पत्रों के आधार पर की जाती है। अतः अधिकार पत्रों के आधार पर बने अभिजात व्यक्तियों के सम्बन्ध में कोई कठिनाई नहीं होती। प्रश्न केवल उठता है कि क्या राजा किसी को आजीवन अभिजात बना सकता है। कभी यह मामला विवादास्पद था