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और विवाद यह था कि क्या राजा द्वारा जीवन भर के लिए बनाये गये किसी अभिजात को हाउस ऑफ लॉर्ड्स में बैठने का अधिकार है? लेकिन अन्ततः यह मामला 1856 के वेनेसडेल अभिजात वर्ग के मामले द्वारा सुलझ गया, जिसमें दो निर्णय लिये गये। (1) कि राजा को आजीवन या पुश्तैनी किसी प्रकार का अभिजात बनाने का अधिकार है लेकिन (2) आजीवन अभिजात, हाउस ऑफ लार्ड्स के एक सदस्य के रूप में सभा में नहीं बैठ सकता और राजा ऐसे अभिजात को निमन्त्रण पत्र नहीं भेज सकता है। इसका कारण यह बताया गया कि अभिजात का पुश्तैनी चरित्र विधि के आधार पर नहीं तो प्रथा के आधार पर अभिजात वर्ग का एक अभिन्न अंग है और यद्यपि राजा को एक अभिजात वर्ग बनाने का अधिकार है, उसे किसी प्रथा को समाप्त करने का अधिकार नहीं है। उन अभिजातों को क्या अधिकार है जो अधिकार पत्रों के आधार पर अभिजात नहीं बनते हैं। उन्हें भी राजा के निमन्त्रण पत्रों के आधार पर यह अधिकार मिल जाता है।
ऐसे अभिजातों को निमन्त्रण पत्र भेजने के बारे में दो प्रश्न चिरकाल से उठाए जाते रहे हैं। क्या हर अभिजात ऐसे निमन्त्रण पत्रों की माँग कर सकता है? क्या राजा को किसी अभिजात को निमन्त्रण पत्र भेजने अथवा न भेजने की छूट है? अभिजात वर्ग की ओर से तर्क दिया गया कि केवल वे अभिजात जो बैरोनी के अनुसार अपनी सेवा अवधि के लिए अभिजात बनते हैं, निमन्त्रण के अधिकारी हैं और राजा इनके अतिरिक्त किसी अन्य अभिजात को आमन्त्रण नहीं भेज सकता है। दूसरी ओर राजा की ओर से यह तर्क दिया गया कि निमन्त्रण पत्र बैरोनी द्वारा अभिजातों को दिया गया कोई विशेषाधिकार नहीं है और न ही अभिजातों को आमन्त्रण पत्र भेजने के अधिकार की कोई सीमा है। अंततः यह विवाद हल कर लिया गया और अब ऐसे दो नियमों का उल्लेख किया जा सकता है जो उन अभिजातों को निमन्त्रण पत्र भेजने के मामले में लागू होते हैं जिनका अभिजात होना अधिकार पत्रों से सिद्ध नहीं होता। 1. बैरोनी द्वारा उल्लिखित सेवा अवधि के आधार पर राजा से रिट की माँग नहीं की जा सकती। 2. राजा के लिए ऐसे व्यक्ति के, जिनसे कभी रिट प्राप्त की हो, और उसके अनुसार उस सभा में अपना स्थान ग्रहण किया हो, के वंशज को हाउस ऑफ लार्ड्स में बैठने के लिए रिट द्वारा आमन्त्रित करना आवश्यक है। दूसरे शब्दों में, यदि यह सिद्ध किया जा सके कि किसी व्यक्ति ने राजा से रिट प्राप्त की थी तो उसका वंशज चाहे वह कितना ही दूर का हो और चाहे जो भी अन्तराल हो, पुश्तैनी अधि कार के आधार पर उसी प्रकार की रिट का दावा कर सकता है। अतः अंग्रेजी अभिजात वर्ग को पुश्तैनी अधिकार के आधार पर राजा से निमन्त्रण प्राप्त करने और हाउस ऑफ लार्ड्स का सदस्य होने का अधिकार है। 3. यद्यपि यह अधिकार पुश्तैनी अधिकार है परन्तु यह दो नियमों के अध्याधीन है। (1) ज्येष्ठता का नियम, (2) पुरुष-वंशज का नियम।