(iv) उच्च सदन (हाउस ऑफ लॉर्ड्स) - Page 162

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पदेन अभिजात

हाउस ऑफ लार्ड्स में बैठने वाले पदेन अभिजात दो वर्गों से आते हैं। (1) आध्यात्मिक लार्ड्स और (2) साधारण अपीलीय लार्ड्स। विधि छब्बीस के अनुसार चर्च के अधिकारियों को हाउस ऑफ लार्ड्स में बैठने का अधिकार है। इनमें से कैंटरबरी और योर्क के आर्कबिशपों और लंदन और दुर्हम और विनचेस्टर के बिशपों को आध्यात्मिक लॉर्ड्स के रूप में हाउस ऑफ लार्ड्स में बैठने का अधिकार है। शेष 21 आध्यात्मिक अभिजातों में से 21 धर्म प्रदेशीय बिशप, नियुक्ति की वरिष्ठता के क्रम में हाउस ऑफ लार्ड्स में बैठ सकते हैं। इस प्रकार यदि इन 21बिशपों में से किसी बिशप की मृत्यु हो जाती है या कोई बिशप त्यागपत्र दे देता है तो हाउस ऑफ लॉर्ड्स में उसका स्थान उसका उत्तराधिकारी नहीं लेता है, अपितु अगला वरिष्ठ धर्मप्रदेशीय बिशप लेता है।

साधारण अपीलीय लॉर्ड्स

हाउस ऑफ लॉर्ड्स संसद का उच्च सदन होने के अलावा एक न्यायालय भी है। यह अधिकांश प्रयोजनों के लिए इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और आयरलैंड में राजदरबारों से अपील का अन्तिम और सर्वोच्च न्यायालय है। यह न्यायिक कृत्य हाउस ऑफ लॉर्ड्स का काम है। अतः सभा के समक्ष इसकी न्यायिक क्षमता में लायी गयी किसी अपील पर निर्णय करने के काम में भाग लेने से संसद के अभिजात को कोई नहीं रोक सकता। हाउस ऑफ लॉर्ड्स मुख्य रूप से साधारण अभिजातों की एक ऐसी संस्था थी, जिन्हें कानून की पेचीदगियों के बारे में में कोई जानकारी नहीं थी और जिन्हें कोई कानूनी प्रशिक्षण प्राप्त नहीं था। ऐसी संस्था को उच्चतम न्यायालय के कृत्यों का निर्वहन करने की अनुमति देने से न्याय को काफी खतरा था। तथापि हाउस ऑफ लॉर्ड्स से यह अधिकार पूर्णतया छीन लेना सम्भव नहीं था। समझौते के तौर पर अपीलीय क्षेत्राधिकार अधिनियम नामक 1876 का अधिनियम पारित किया गया। इसके अन्तर्गत हाउस ऑफ लॉर्ड्स अन्तिम अपीलीय न्यायालय तो बना रहा, लेकिन इसमें यह प्रावधान किया गया कि हाउस ऑफ लॉर्ड्स द्वारा तब तक किसी अपील की सुनवाई नहीं की जाएगी तथा उसका अवधारण नहीं किया जाएगा, जब तक कि ऐसी सुनवाई तथा अवधारणा के समय कम-से-कम तीन अपीलीय लॉर्ड उपस्थित न हों। अपीलीय लॉर्ड्स में शामिल होते हैंµ (1) तत्कालीन लॉर्ड चांसलर, (2) सभा के ऐसे लॉर्ड्स जो उच्च न्यायिक पदों पर आसीन रहे हों और (3) राजा द्वारा नियुक्त किये गये असाधारण अपीलीय लॉर्ड्स।

1876 के अपीलीय क्षेत्राधिकार अधिनियम के अन्तर्गत राजा को हाउस ऑफ लॉर्ड्स में बैठने के लिए असाधारण अपीलीय लॉर्ड्स की नियुक्ति करने का अधिकार दिया गया। इस अधिनियम में यह भी प्रावधान किया गया कि वे अपीलीय लॉर्ड तब तक अभिजात रहेंगे जब तक कि वे अपीलीय लॉर्ड के रूप में अपने न्यायिक कृत्यों का