148 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
निर्वहन करते रहेंगे। तथापि 1887 में यह प्रावधान बदल दिया गया और अब असाधारण अपीलीय लॉर्ड आजीवन अभिजात रह सकता है।
हाउस ऑफ लॉर्ड्स के गठन के बारे में बताने के पश्चात अब हम इससे सम्बन्धित कुछ प्रश्नों पर विचार करेंगे। पहला प्रश्न हैµ हाउस ऑफ लॉर्ड्स में बैठने का इन अभिजातों को क्या अधिकार है? अभिजातों को हाउस ऑफ लॉर्ड्स में बैठने का अधि कार इसलिए नहीं है कि वे चुन कर आते हैं जैसा कि हाउस ऑफ कॉमन्स के सदस्यों के मामले में होता है। उन्हें यह अधिकार उन आमन्त्रण पत्रों से मिलता है जो प्रत्येक अभिजात को आने और संसद में उपस्थित रहने के लिए अलग-अलग भेजे जाते हैं। यह एक प्रकार से राजा द्वारा नामांकन है, यद्यपि मनोनीत करने की शक्त पूरी तरह नियन्त्रित है और राजा को स्वविवेक से एक संसद से दूसरी संसद में नामांकन की प्रक्रिया को रद्द करने अथवा उसमें परिवर्तन करने का कोई अधिकार नहीं है।
यद्यपि अभिजात का अधिकार राजा द्वारा जारी किये जाने वाले आमन्त्रण पत्र पर आधारित है, अभिजातों को आमन्त्रित करने के राजा के अधिकारों पर कुछ प्रतिबन्ध लगे हुए हैं। एक विदेशी अभिजात अर्थात ऐसा अभिजात जो ब्रिटेन का नागरिक नहीं है, संसद में बैठने के लिए आमन्त्रित नहीं किया जा सकता।
दूसरा प्रश्न जिस पर विचार किया जाना चाहिए, अभिजात की उपाधि के लिए ग्राह्यता और अभिजात द्वारा अपनी उपाधि छोड़े जाने के बारे में है। अभिजात की उपाधि अहस्तांतरणीय पद है और इस अधिकार को किसी अन्य को बिक्री या उपहार द्वारा हस्तांतरित नहीं किया जा सकता है। दूसरा व्यक्ति पैतृक नियमों के अनुसार उत्तराधिकारी द्वारा इसका दावा कर सकता है। अभिजात अपनी उपाधि नहीं छोड़ सकता और यह नहीं कह सकता कि अब वह अभिजात नहीं रहा है। अभिजात की उपाधि के मामले में जो नियम लागू होता है वह यह है कि एक बार अभिजात, तो सदैव के लिए अभिजात।
तीसरा प्रश्न अभिजात वर्ग और हाउस ऑफ लॉर्ड्स के बीच के अन्तर से सम्बन्धित है। आमतौर पर राज्य के अभिजात का प्रयोग एक ही अर्थ में किया जाता है। कानूनी तौर पर इन दोनों में अन्तर है। एक व्यक्ति राज्य का अभिजात हो सकता है, पर हाउस ऑफ लॉर्ड्स का सदस्य नहीं हो सकता। आजीवन अभिजात इसका एक उदाहरण है। आजीवन अभिजात राज्य का अभिजात है, फिर भी वह हाउस ऑफ लॉर्ड्स का सदस्य नहीं हो सकता क्योंकि नियम यह है कि जो पदेन अभिजात न होकर अन्यथा अभिजात है उसे पुश्तैनी अभिजात होना चाहिए ताकि हाउस ऑफ लॉर्ड्स में बैठने का अधिकार प्राप्त कर सके। इसके विपरीत एक व्यक्ति हाउस ऑफ लॉर्ड्स का सदस्य हो सकता है यद्यपि वह पुश्तैनी अभिजात नहीं है। आध्यात्मिक लॉर्ड्स और असाधारण अपीलीय लॉर्ड्स का मामला इसका एक और उदाहरण है। आर्क बिशप एवं बिशप और असाधारण अपीलीय लॉर्ड,