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या विधि बहिष्कृत व्यक्ति संसद के लिए निर्वाचित नहीं किया जा सकता। बक्स की काउंटी ने श्री गुडविन को निर्वाचित किया। वह एक विधि बहिष्कृत व्यक्ति था। राजा ने उसके निर्वाचन को अवैध घोषित कर दिया तथा एक और आदेश जारी किया। इस बार श्री फोरेटेसक निर्वाचित हुए। हाउस ऑफ कॉमन्स ने अपने प्रस्ताव पर यह संकल्प लिया कि यद्यपि राजा ने श्री गुडविन के निर्वाचन का परिवर्जन किया है, तथापि श्री गुडविन सभा का विधिवत निर्वाचित सदस्य है। दूसरी ओर राजा ने इस मसले को तय करने के अधिकार का दावा किया। राजा, हाउस ऑफ कॉमन्स के सदस्यों तथा हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्यों के बीच हुए एक सम्मेलन में लॉर्ड्स ने राजा को पराजय स्वीकार करने और कॉमन्स के अधिकार को मान्यता देने की सलाह दी। सभा द्वारा विवादित निर्वाचन की सुनवाई सभा के लिए परेशानी और उम्मीदवारों के लिए उत्सुक्ता का कारण बन गयी क्योंकि ऐसी सुनवाई दलीय राजनीति का विषय बन गयी और 1868 में सभा ने कानून बना कर विवादित निर्वाचनों का निर्णय करने का काम न्यायालय पर छोड़ दिया।
सभा का तीसरा विशेषाधिकार ऐसे सदस्य को सभा से निष्कासित करने का अधिकार है जो ऐसे ढंग से व्यवहार करता है कि वह सभा में बैठने के योग्य नहीं रहता। निष्कासन कोई निरर्हता नहीं है और निष्कासित सदस्य को पुनः चुना जा सकता है। यह याद रखना चाहिए कि चुने जाने के अधिकार से सभा में बैठने का अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता। कोई व्यक्ति निर्वाचित होता है तो यह मतदाताओं की उस पर कृपा है, लेकिन सभा में बैठने की कृपा सभा ही कर सकती है। ऐसे मामले हुए हैं जिनमें लोग हाउस ऑफ कॉमन्स के लिए विधिवत् निर्वाचित हुए, लेकिन वे सभा में अपना स्थान ग्रहण नहीं कर सके। विल्केस का मामला इसका एक उदाहरण है। विल्केस को मिडलसेक्स की काउंटी द्वारा लगातार चार बार निर्वाचित किया गया और चारों बार उसे सभा में स्थान नहीं दिया गया।
हाउस ऑफ कॉमन्स का एक और महत्त्वपूर्ण विशेषाधिकार सभा में उद्भूत मामलों का संज्ञान लेने का एकाधिकार है। इस विशेषाधिकार के अन्तर्गत सभा को अपनी आन्तरिक कार्यवाही तथा मामलों और अपने कारोबार का तरीका तथा ढंग नियमित करने का पूरा अधिकार है और कोई न्यायालय उन चीजों का संज्ञान नहीं ले सकता जो उसकी सीमा के भीतर होती है। इस विशेषाधिकार का स्वरूप और विस्तार क्या है, यह बात ब्रेडलाफ बनाम गोसेट के मामले से स्पष्ट हो जाती है। इस मामले के तथ्य सहज हैं। 3 मई, 1880 को श्री ब्रेडलाफ ने जो नार्थेम्टन से एक सदस्य निर्वाचित हुआ था, शपथ की बजाय प्रतिज्ञान करने की माँग की, क्योंकि वह एक नास्तिक था। हाउस ऑफ कॉमन्स की एक समिति ने प्रतिवेदन किया कि प्रतिज्ञान न्यायालय की कार्यवाही में होती है और संसद सदस्य ऐसा नहीं कर सकते। संसद सदस्य केवल शपथ ही ले सकते हैं। इस रिपोर्ट के पश्चात् ब्रेडलाफ