(v) उच्च सदन और सामान्य सदन की शक्तियाँ तथा विशेषाधिकार - Page 167

152 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

अध्यक्ष के पटल के पास शपथ लेने गया। तथापि सभी ने इस आधार पर आपत्ति की कि इनके अन्तःकरण को बाध्य नहीं किया जा सकता और यह एक औपचारिकता है। यह रिपोर्ट करने के लिए एक और समिति बनायी गयी कि क्या श्री ब्रेडलाफ को शपथ लेने की अनुमति दी जाये। इस समिति ने रिपोर्ट दी कि उसे शपथ लेने की अनुमति दी जाये क्योंकि इसकी वैधता की जाँच न्यायालय में की जाएगी। इसके अनुसार श्री ब्रेडलाफ को प्रतिज्ञान करने की अनुमति देने के लिए एक प्रस्ताव रखा गया जिसमें एक संशोधन किया गया। इस संशोधन में उसे न तो उसके शपथ लेने और न ही प्रतिज्ञान करने की अनुमति देने का प्रस्ताव किया गया। तथापि ब्रेडलाफ ने शपथ लेने के अपने अधिकार पर बल दिया, लेकिन अध्यक्ष ने उसे बाहर जाने के लिए कहा। उसने इंकार कर दिया। तत्पश्चात सारजेंट से श्री ब्रेडलाफ को बाहर निकालने के लिए कहा गया। इस पर श्री गोसेट सारजेंट और श्री ब्रेडलाफ के बीच हाथापाई हो गयी जिसमें श्री ब्रेडलाफ बुरी तरह जख्मी हो गया। अतः प्रतिज्ञान करने की अनुमति देने का एक स्थाई आदेश पारित किया गया। श्री ब्रेडलाफ ने प्रतिज्ञान किया किन्तु न्यायालय ने घोषणा की कि कोई संसद सदस्य प्रतिज्ञान नहीं कर सकता। उसके पश्चात् उसका स्थान खाली रखा गया। उसके 1881 में पुनः निर्वाचित होने पर उसी दृश्य की पुनरावृत्ति हुई। जब कभी वह शपथ लेने के लिए पटल के पास आया तो सभा ने संकल्प लिया कि उसे ऐसा करने की अनुमति न दी जाये। एक अवसर पर अध्यक्ष के निर्देशानुसार सारजेंट गोसेट ब्रेडलाफ को सभा के बाहर ले गया और बाद में उसे निष्कासित कर दिया गया। ब्रेडलाफ रानी की खंडपीठ में गोसेट के विरुद्ध एक वाद लाया जिसमें माँग की गयी कि शपथ लेने से उसे रोकने के लिए गोसेट को बल का प्रयोग न करने का आदेश दिया जाये। इस पर सभा ने सारजेंट के बचाव का सामान्य आदेश दे दिया। रानी की खंडपीठ ने श्री ब्रेडलाफ को इस आधार पर सहायता देने से इंकार कर दिया कि गोसेट ने जिस आदेश के अन्तर्गत कार्यवाही की उसका सम्बन्ध सभा की प्रक्रिया से है और ऐसे मामले में न्यायालय को हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है।

हाउस ऑफ कॉमन्स अपने वैभव और प्रभुत्व की रक्षा करने के विशेषाधिकार का दावा करता है। सभा जिन कार्यों को अपमान अथवा अपनी मर्यादा के प्रतिकूल समझ सकती है उनकी गणना करने का प्रयास करना यहाँ व्यर्थ होगा। लेकिन कुछ सिद्धान्त प्रस्तुत किये जा सकते हैंµ

  1. सभा की कार्यवाही से सम्बन्धित किसी आदेश अथवा नियम की अवज्ञा विशेषाधि कार का उल्लंघन है। सभा के संकल्प के प्रतिकूल वाद-विवादों का प्रकाशन, वाद-विवादों का जानबूझ कर मिथ्या-निरूपण, सभा के समक्ष प्रतिवेदन करने से पूर्व प्रवर समिति के समक्ष साक्ष्य का प्रकाशन, इस नियम के उल्लंघन के उदाहरण हैं।