अध्याय-1 : प्राचीन भारतीय वाणिज्य - Page 17

भाग एक

प्राचीन भारतीय वाणिज्य

अध्याय 1. मध्य पूर्व में भारत के व्यापारिक सम्बन्ध

अध्याय 2. मध्य युग में भारत के व्यापारिक सम्बन्ध

अध्याय 3. अंग्रेशी सरकार के पूर्व का भारत

(पांडुलिपि में यह अध्याय संख्या 5 के रूप में है।

अध्याय 3 और 4 खो गए प्रतीत होते हैं।)

प्राचीन भारतीय वाणिज्य से संबंधित इस भाग की विषय सामग्री तीन अध्यायों (मूल अध्याय संख्या 1, 2, 5) में दी गई है। यह सामग्री डॉ. अम्बेडकर ने 1913-15 के दौरान विश्वविद्यालय की एम.ए. परीक्षा के एक शोध निबंध के रूप में तैयार की थी। बाद में उन्होंने एक नया विषय ले लिया, जो अब ‘ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रशासन और वित्तपोषण’ के नाम से जाना जाता है जिसे इस ग्रंथ-माला के गं्रथ-6 में प्रकाशित किया गया है। डॉ. अम्बेडकर एक सुलेखक थे। उनकी हस्तलिपि की एक प्रति (1913-15) यहाँ छापी गई है, ताकि भावी पीढ़ी इसका अनुसरण कर सके।

-सम्पादक