अध्याय 1
मध्य पूर्व में भारत के व्यापारिक सम्बन्ध
रोम के राजाओं ने पूर्व व पश्चिम दोनों दिशाओं में अपनी तलवार फैलाई जिसके परिणाम अलग-अलग रहे। पूर्व में उन्होंने केवल ख्1, ..... को देने के लिए देश जीते। तथापि पश्चिम में उन्होंने लोगों को जो प्रथमतया उनके मातहत ख्2, ................... थे, रोमन बनाया, अथवा उन्हें छोड़ दिया ताकि वे अपनी इच्छा से रोमनीकरण स्वीकार कर लें। इस प्रकार रोमनीकरण के परिणामस्वरूप पश्चिम को रोम के लोगों से जो विरासत मिली पश्चिमी देशों को उस पर गर्व है। यह समृद्ध विरासत किस प्रकार संचित हुई इसके बारे में जानने के लिए किसी ने कोई प्रयास नहीं किया।
यदि हम सैन्य संगठन, कानून की संपन्नता, युद्ध से पहले तथा जीत के पश्चात् सैनिकों का आश्चर्यजनक ढंग से अनुशासन पालन किए जाने के लिए रोम के लोगों से प्रेरणा लेते हैं तो यह ठीक ही है। चारों दिशाओं से घिर जाने पर उत्तर में एटरूसकांस्पियों, पश्चिम में मुसलमानों, पूर्व में सेबियाइयों तथा दक्षिण में यूनानियों द्वारा लातीनी लोग जब निराश हो गए तो उन्होंने शक्ति बटोरी। संभवतः स्त्रियों तथा बच्चों को छोड़कर बाकी सभी लोगों ने एक विशाल सेना का रूप धारण कर लिया जो आवश्यकता पड़ने पर किसी भी समय लाल झंडे के नीचे एक साथ खड़ी हो सकती थी। रोम ने, वहाँ जितना स्थान था उससे अधिक शक्ति एकत्र कर ली और इस सिद्धान्त का प्रतिपादन किया कि शक्ति के बढ़ने से विस्फोट और विस्तार होता है। राज्य क्षेत्र के विस्तार की लालसा या विदेशी उत्पीड़न के उन्माद में आकर रोम ने पहले इटली प्रायद्वीप को अपने अधिकार में लिया। अपना साम्राज्य बढ़ाने के इच्छुक लोग कहीं रुकना नहीं जानते। रोम अपने हथियारों के बल पर विश्व को जीतने के अभियान पर निकल पड़ा और युद्ध को अपना एकमात्र भद्र व्यवसाय बना लिया। वे नहीं जानते थे कि युद्ध स्पर्धा की भाँति स्वयं को भी नष्ट करता है। एक तीव्र आवेगी रोम ने बहुत बड़ा क्षेत्र अपने अधिकार में ले लिया, लेकिन जब आगे बढ़ने की शक्ति
खत्म हो गई, जो होना ही था, तो रोम ने अपना व्यापक विस्तार क्षेत्र छोड़ दिया और पुनः अपना क्षेत्र संकुचित कर लिया।
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यह भाग दीमक ने खा लिया है।