(v) उच्च सदन और सामान्य सदन की शक्तियाँ तथा विशेषाधिकार - Page 170

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जाये तो संसद के कार्यकाल तक अपने पद पर बना रहता है। आरम्भ में यह अधिकार राजा को था और वह वास्तव में चयन करने के अपने अधिकार का प्रयोग करता था। 1679 में अध्यक्ष का चयन करने के अधिकार को लेकर चार्ल्स II और नव निर्वाचित हाउस ऑफ कॉमन्स के बीच विवाद हो गया। हाउस ऑफ कॉमन्स के सदस्यों ने सर एडवर्ड सेमूर का चयन किया और राजा ने हाउस ऑफ कॉमन्स के अपने व्यक्ति का सुझाव दिया और सभा ने उसे अध्यक्ष स्वीकार करने से इंकार कर दिया। अन्ततः एक समझौता हुआ और कोई दूसरा व्यक्ति जो हाउस ऑफ कॉमन्स के सदस्यों की अपनी पसंद का था, उसे अपना अध्यक्ष स्वीकार किया गया। उस पर राजा ने भी अपना अध्यक्ष चुनने के हाउस ऑफ कॉमन्स के अधिकार का विरोध नहीं किया।

भाग- VII

अध्यक्ष के कर्तव्य

हाउस ऑफ कॉमन्स का अध्यक्ष तीन अलग रूपों में काम करता है। वह सभा के प्रवक्ता तथा प्रतिनिधि के रूप में निम्नलिखित कार्य करता हैµ

  1. वह सभा के विशेषाधिकारों की माँग करता है और इसके धन्यवाद प्रस्ताव को पारित करता है तथा चेतावनी और फटकार सुनिश्चित करता है।

  2. जब कभी किसी व्यक्ति को विशेषाधिकार भंग करने के कारण सजा दी जाती है तो वह गिरफतारी के वारंट जारी करता है। वह सभा द्वारा प्रताड़ना या सजा दिये जाने के लिए अथवा सभा के आदेशानुसार किसी अन्य प्रयोजन के लिए उसे न्यायालय में उपस्थित होने के लिए वारंट जारी करता है।

  3. वह रिक्त स्थान भरने के आदेश जारी करता है। 1911 के संसद अधिनियम के अन्तर्गत अध्यक्ष को एक नया काम दिया गया है जो पहले उसके पास नहीं था। इस अधिनियम के अन्तर्गत वह एक न्यायिक अधिकारी के रूप में काम करता है और इस हैसियत से उसे यह प्रमाणित करना होता है कि कोई विशेष विधेयक, वित्त विधेयक है या नहीं है।

जब कभी सभा अपना कार्य करने के लिए समवेत होती है तो अध्यक्ष सभा का सभापति होता है। सभापति की हैसियत से उससे यह अपेक्षा की जाती हैµ

  1. वाद-विवादों में व्यवस्था बनाए रखना।

  2. व्यवस्था के प्रश्नों का फैसला करना।

  3. विचाराधीन प्रश्न सभा के समक्ष रखना।

  4. प्रश्न पर सभा के निर्णय की घोषणा करना।