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से स्पष्ट हो जाती है, जिसमें हाउस ऑफ लॉर्ड्स के अध्यक्ष के रूप में लॉर्ड चांसलर के कर्तव्य परिभाषित किये गये हैं। इस स्थाई आदेश में कहा गया हैµ फ्लॉर्ड चांसलर को जब सभा से कुछ कहना होता है, तो वह सदैव मुक्त रूप से कहता है और वह पहले सभा के सदस्यों की अनुमति लिये बिना सभा को स्थगित नहीं कर सकता। वह सभा के प्रवक्ता के रूप में कोई भी कार्य कर सकता है सिवाय इसके कि विधेयकों के मामलों में छोटी-मोटी चीज कर सकता है, और ये उसके अधिकार हैं। लॉर्ड्स (सदस्यों) में मतभेद हो, तो मामला सभा के समक्ष रखा जाता है और यदि लॉर्ड चांसलर को कोई विशेष बात कहनी हो, तो उसे अभिजात के रूप में अपने स्थान पर जाना पड़ता है और इस बात का ध्यान रखा जाता है कि लॉर्ड चांसलर का स्थान सदन की बॉईं ओर होता है।य् इस स्थाई आदेश से स्पष्ट हो जाता है कि हाउस ऑफ लॉर्ड्स में अध्यक्ष का प्राधिकार कितना सीमित है।
व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियम लागू करने में हाउस ऑफ लॉर्ड्स के अध्यक्ष को किसी अन्य अभिजात से अधिक अधिकार प्राप्त नहीं हैं।
वह हाउस ऑफ कॉमन्स के अध्यक्ष की तरह व्यवस्था के प्रश्न का फैसला नहीं कर सकता। वह अभिजात है, तो वह उठाये गये किसी व्यवस्था के प्रश्न पर सभा को सम्बोधित कर सकता है, लेकिन इसका फैसला सभा का बहुमत ही करेगा।
सभा की कार्यवाही का संचालन करने में हाउस ऑफ लॉर्ड्स के अध्यक्ष का सीमित अधिकार होने के कारण एक अभिजात का सभा को सम्बोधित करने का अधि कार उस पर निर्भर नहीं करता है जैसा कि हाउस ऑफ कॉमन्स में होता है, अपितु यह पूर्णतया सभा की इच्छा पर निर्भर करता है। जब दो अभिजात एक साथ खड़े हो जाते हैं तो यदि एक तुरन्त दूसरे को अवसर नहीं देता तो सभा उनमें से एक को बोलने के लिए पुकारती है और यदि प्रत्येक का किसी दल द्वारा समर्थन किया जाता है तो विभाजन के अलावा कोई विकल्प नहीं रह जाता। हाउस ऑफ कॉमन्स की तरह इस मामले में अध्यक्ष फैसला नहीं करता।
अतः अध्यक्ष को अधूरी शक्तियाँ प्राप्त होने का परिणाम यह होता है कि एक उत्पाती अभिजात को, सम्भवतया विपक्ष के किसी अन्य अभिजात द्वारा शान्त किया जाता है और इस प्रकार एक नियम विरुद्ध बहस शुरू हो सकती है। इस प्रकार हर अन्तिम वक्ता व अव्यवस्था के लिए अपने से पूर्व के वक्ता को दोषी ठहराता है और एक व्यवस्थित वाद-विवाद के स्थान पर एक-दूसरे पर दोष लगाये जाने का काम होने लगता है। लॉर्ड चांसलर बैठ कर देखता रहता है, लेकिन वह हस्तक्षेप नहीं कर सकता, क्योंकि उसे केवल प्रश्न पूछने और अन्य औपचारिक कार्यवाही चलाने का अधिकार है।