अध्याय-1 : प्राचीन भारतीय वाणिज्य - Page 20

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फ्कांस्टेटाइन द्वारा रोम को राजनैतिक सत्ता का केंद्र बनाए जाने से पहले पूर्व के देशों में, मुख्यतः प्राचीन सभ्यता के इन देशों में, हमें उद्योगों तथा धन-दौलत, तकनीकी योग्यता तथा कलात्मक उत्पादन और ज्ञान व विज्ञान की बात देखनी चाहिए। ख्1, पूर्व के देशों की मनीषा से ज्ञान की सभी शाखाएँ प्रभावित हुई थीं। ख्2, वे तकनीकी ज्ञान आविष्कारशील बुद्धि तथा कारीगरों की योग्यता के मामले में रोम से आगे थे। ख्2, औद्योगिक कलाओं के उत्पादन से स्वयं उद्योग तक इसमें पूर्वी देशों के बढ़ते प्रभाव की झलक मिलती है। यह देखा जा सकता है कि पूर्वी देशों के बड़े उत्पादन केंद्रों ने धीरे-धीरे यूरोपीय भौतिक सभ्यता को कैसे बदला। यह बताया जा सकता है कि गौल में विदेशी पद्धतियों तथा प्रक्रियाओं के सूत्रपात से वहाँ के पुरातन स्थानीय उद्योग में कैसे परिवर्तन आया और उनके उत्पादों में कैसे सुधार हुआ और वे अप्रत्याशित रूप से कैसे हो गए। अति प्राचीन काल से औद्योगिक क्रान्ति तक, पूर्वी देशों को विश्व कार्यशाला समझा जाता था और इस बात पर ध्यान देना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि जब पूर्व के देशों में बड़ी मात्रा में लोहे के खंभे बनाए जा रहे थे उस समय पश्चिमी देशों के लिए पत्थर तराशना तथा कुल्हाड़ी बनाना एक उत्कृष्ट मानव कृत्य था।

इस प्रकार, पूर्व ने पश्चिम को प्रेरणा दी।ऽ जहाँ सर्वप्रथम सभ्यता का बीज फूटा, जहाँ ज्ञान तथा उन्नति का सूत्रपात हुआ, वे स्थान थे नील नदी की घाटी, युफरेटस, यांग्स्टी क्यांग तथा सिंधु घाटी। यूनान और रोम ने तो पूर्व से प्रकाश ग्रहण करके उसकी आभा पश्चिम में फैलाई। ख्1,

इस दृष्टि से देखा जाए तो ‘अंधकार युग’ की बात इतिहासकारों की कल्पना मात्र है। क्या ऐसा ‘अँधा युग’ कभी यूरोप में था? यदि हाँ, तब वहाँ प्रकाश कब आया? इतिहास से यह बात स्पष्ट नहीं होती। जो कुछ भी सभ्यता व प्रकाश वहाँ था वह भूमध्य सागर की पूर्वी घाटी में सीमित था और यह पूर्व से आता था। इसके अलावा, समूचे यूरोपीय महाद्वीप में काफी देर तक बर्बरता का बोलबाला रहा। यूरोपीय सभ्यता की रेखा लगातार ऊपर जा रही है और जिस युग को इतिहासकार अंधकार युग कहते हैं उस युग में सभ्यता का स्तर पिछली कुछ सदियों की सभ्यता के स्तर से ऊँचा था। अंधकार युग की कल्पना समस्त यूरोप को रोम का पर्याय मानने की गलत धारणा के कारण की गई, लेकिन किसी एक रंग को देखकर पूरे शरीर की कल्पना कर लेना गलत है।

तथ्यों का पता लगाने के लिए ‘अंधकार युग’ का प्रश्न पूर्व के इतिहासकारों द्वारा उठाया जाना चाहिए। पूर्व के इतिहासकारों को ही यह बताना होगा कि शिखर तक पहुँचने के

ऽ कुछ हिस्सा दीमकों ने खा लिया है।

  1. डब्ल्यू. आर. पेटर्सन, फ्द नेमिसिस ऑफ नेशंस,य् पृष्ठ 334

  2. फ्रेंज कुमार रिलीजन्स/पेगनिज्म