6 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
पश्चात यह महापतन कैसे हुआ, सूर्योदय के पश्चात एकदम यह अंधकार कैसे हो गया?
यह शोचनीय है कि आदिकालीन एवं सर्वाधिक उदीयमान सभ्यता अंधकार में चली गई और एकदम रुक गई जबकि उससे उन्नति की आशा थी। आदिकालीन सभ्यताओं में से कुछ सभ्यताएँ लुप्त हो गईं और ईंटों तथा पटलों पर लेखों के रूप में उनके अवशेष रह गए।
इतिहासकार बहुधा सोचते हैं कि सभ्यता एक विशिष्ट स्थान पर ही क्यों विकसित होती है, अन्य स्थान पर क्यों नहीं? क्या ऐसा वहाँ के निवासियों की योग्यता के कारण होता है? अथवा इसलिए कि भगवान की ही इच्छा उन्हें सभ्यता प्रदान करने की थी? थोड़ा विचार करने पर हम समझ जाएँगे कि ये दोनों ही बातें निरर्थक हैं। पहली बात पर्यावरण की भूमिका। यदि समृद्ध पर्यावरण हो और उसके संरक्षण के अवसर मौजूद हों, या विदेशी आक्रमण का अभाव हो, तो सभ्यता का पनपना अवश्यम्भावी है।
भारत की भौगोलिक स्थिति ने उसे सभ्यता की प्रारंभिक जननी बना दिया। प्रकृति ने उसे यह पृथकत्वता प्रदान की है जिसकी तमन्ना बहुत से ऐसे कबीले करते हैं जो अपनी सामर्थ्य को विकसित करने और प्रकृति के वरदानों का पूरा लाभ उठाने के लिए सदा एक सुरक्षित स्थान की तलाश में रहते हैं। उत्तर में हिमालय की पर्वत-श्रेणियों द्वारा चीन तथा तिब्बत से पूर्व में टेनासिरिश्म द्वारा बर्मा तथा असम से और पश्चिम में (कराकोरम) (हिन्दुकुश) की शृंखलाओं द्वारा अफगानिस्तान से पृथक यह समस्त प्रायद्वीप स्वयं अपने में एक छोटी दुनिया बन गया है जिसकी मशबूत प्राकृतिक किलेबंदी है, फ्उत्तर-पश्चिम में पर्वतों की दीवार और अन्य सभी ओर समुद्र की खाई।ऽ ख्1,
यह ‘विलोम त्रिकोण’ अपने में अत्यंत विविध तथा अत्यंत प्रचुर प्राकृतिक साधन समाए है। ब्रिटिश भारत में न केवल पशुओं की प्रचुरता है, अपितु एक अनूठी विविधता भी है। भारत में इतनी किस्मों के पशु हैं कि उनमें से कुछ की केवल आकृति ही मेल
खाती है और कोई समानता नहीं है। प्राचीन काल में जिस समय भारत पर भारतीयों का ही अधिकार था, तब भारत ने जितनी प्रगति की उतनी प्रगति आदिम मानव से आशा नहीं की जा सकती थी। हमारे पास उसके कृत्यों का बहुत कम लेखा-जोखा है, किन्तु जो भी हमारे पास उपलब्ध है उससे हमें काफी जानकारी मिलती है जैसा कि नीचे दिए गए विवरण से स्पष्ट हो जाएगा।
हमारा संबंध इस बात से नहीं है कि भारतीयों ने अनेक क्षेत्रों में क्या-क्या उपलब्धियाँ प्राप्त कीं। हमें अपना ध्यान केवल उनकी आर्थिक नीतियों पर केंद्रित करना है। प्रारंभ में उन पर विचार करना बेहतर होगा क्योंकि इससे हमें अपनी समीक्षा में सहायता मिलेगी।
- ब्रुक एडम्स, लॉ ऑफ सिविलाइजेशंस एंड डिके