अध्याय-1 : प्राचीन भारतीय वाणिज्य - Page 23

8 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

खाद्य पदार्थ समझा जाता था।’’

कोई भी आदमी खेती कर सकता था, यहाँ तक कि ब्राह्मण भी खेती करते थे। वे छोटे-बड़े किसान बन सकते थे। इससे उनकी जाति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता था। पुरातन तथा आधुनिक हिंदुओं को खेती से पुरातन यूनानियों से भी अधिक प्रेम है। यह बात इस तथ्य से स्पष्ट हो जाती है कि वे गाय की पूजा करते हैं।

हिंदुओं की गाय के प्रति श्रद्धा अधिकांश विदेशियों के लिए एक पहेली बनी हुई है और सबसे बड़ी बात यह है कि उन अधपके धर्मप्रचारक मिशनरियों के लिए एक आकर्षण है जो अपने धर्म प्रचार के लिए भारत आकर हिन्दुओं को ठगते हैं।

गाय की पूजा के पीछे वही आर्थिक भावना है जो रोम में देवताओं को बिना छाँटी अंगूर की शराब न देने के पीछे है। गाय और इसी तरह के अन्य पशु किसानों के प्राण हैं। गाय बैलों को जन्म देती है, जो खेत जोतने के लिए अति आवश्यक हैं। यदि हम गाय को गोश्त के लिए मार देते हैं तो अपनी खेती की संपन्नता को खतरे में डालते हैं। पूरी दूरदर्शिता से प्राचीन हिंदुओं ने गाय का माँस खाने पर रोक लगा दी और इस प्रकार गायों का मारा जाना रोका। लेकिन इसके पीछे धार्मिक स्वीकृति भी होनी चाहिए। इसलिए पुराने हिंदू धार्मिक साहित्य में गाय के बारे में विभिन्न कथाएँ पाई जाती हैं।

2. श्रमिक वर्ग, उद्योग तथा वाणिज्य का संगठन

यह तथ्य हिंदुओं की साख बढ़ाता है कि उनके आर्थिक जीवन में दासता की बहुत कम भूमिका रही है। पकड़ा जाना, कानूनी सशा, अपने आप पतित होना तथा ऋण - ये चार मुख्य कारण हैं, जिनसे मनुष्य दास बनता है। किंतु यह सिद्ध करने के पर्याप्त प्रमाण हैं कि दयालुता का व्यवहार किया जाता था और दास मुक्ति हर समय संभव थी। दासों की संख्या बहुत कम थी। जो भी लोग मशदूरी करते थे उनको नकद या अनाज के रूप में मशदूरी मिलती थी और अधिकांश संख्या ऐसे ही लोगों की थी।

उद्योग-धंधा करने वालों में निम्नलिखित आते हैंःµ

(क) बद्धधाकी µ इस श्रेणी में बढ़ई, जहाश निर्माता, बैलगाड़ी बनाने वाले तथा वास्तुकार आते हैं।

(ख) कम्मारा µ इस श्रेणी में धातु शिल्पकार अर्थात लोहे के औशार जैसे हल की फाली, कुल्हाड़ी, लोहे का सामान, उस्तरा, सुई जो पानी पर तैर सकती है और चाँदी या सोने की मूर्ति बनाने वाले आते हैं।

(ग) पसना कोट्टक µ इस श्रेणी में न केवल पत्थरों की खदान करने और पत्थर तराशने वाले अपितु कोटरिका बनाने वाले भी आते हैं।