अध्याय-1 : प्राचीन भारतीय वाणिज्य - Page 26

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तो मान सकते हैं कि भागौलिक कारणों से भारत की यह दशा हुई है, लेकिन इसमें अतिश्योक्तिपूर्ण कथनों की हम निंदा करते हैं।

यदि हम चाहें, तो मोंटेस्क्यू की इस बात से सहमत हो सकते हैं कि पूर्वी देशों के तौरµतरीके, रीतिµरिवाजों और धर्म में ‘स्थिरता’ यहाँ की गर्म जलवायु है। हम बकल के इस कथन को मान सकते हैं कि भारत में ऊँचेµऊँचे पर्वत तथा घने वन होने के कारण ही भारत के लोग बड़े कल्पनाशील तथा अंधµविश्वासी हैं, अथवा हम वैज्ञानिक भूगोलवेत्ता की इस बात को मान सकते हैं कि भौगोलिक स्थिति के कारण ही भारत एकाकी है। भारत हिमालय पर्वत के कारण चीन से अलग है तथा हिंदूकुश पहाड़ के कारण फारस और अफगानिस्तान से अलग है। भारत का समुद्र तट बहुत लम्बा है लेकिन तट पर पूर्वी व पश्चिमी घाट होने से समुद्र का जहाजरानी के लिए उपयोग नहीं हुआ है।

इन सभी आरोपों में संभवतया कुछ सच्चाई है, लेकिन इन के आधार पर कोई निश्चित राय बना लेना गलत होगा। रुकावटें कितनी ही मजबूत क्यों न हों, मनुष्य के लिए अजेय नहीं हैं। मनुष्यों ने हर जगह उन्हें नियंत्रण में लेने का प्रयास किया है और अपने प्रयास में सफल हुआ है।

सभी ओर से घिरे, प्राचीन भारतीयों ने सभी प्राकृतिक तथा अन्य बाधाओं को तोड़ कर हिंद महासागर में प्रवेश किया। हिंद महासागर और भूमध्य सागर में काफी समानता है। श्री जिमनर्न का कहना है कि फ्चारों ओर से भूमि से घिरे होने के कारण भूमध्य सागर गर्मी में अंदरूनी झील की भाँति सुंदर लगता है। वास्तव में प्रकृति ने इसे दो रूप प्रदान किये हैं।’’ जब देवता प्रसन्न होते हैं तो यह झील का रूप धारण कर लेता है और जब देवता क्रोधित होते हैं तो यह समुद्र का रूप धारण कर लेता है। ख्1, हिंद महासागर भूमध्य सागर का एक विस्तृत रूप ही है। इसका दक्षिणी तट हटा दिया जाए तो यह न समुद्र रहता है न झील। रटजैल के अनुसार, यह आधा समुद्र है। इसके उत्तरी भाग में पहाड़ होने के कारण इसमें जल और वातावरण की वे विशेषताएँ नहीं हैं जो एक समुद्र में होती है और निकटवर्ती भू-क्षेत्रों के कारण इस पर अव्यवस्थित ढंग से हवाएँ और लहरें चलती हैं। उत्तरी पूर्वी व दक्षिणी पूर्वी पवनों ने व्यापारियों को तट से चिपके रहने के बजाय समुद्र के बीच आने के लिए आकर्षित किया।

फ्इतिहास के आरम्भ से ही उत्तरी हिंद महासागर एक आम रास्ता था। सिकंदरµएµआजम द्वारा पूर्व दिशा में पुराने समुद्र मार्ग की दुबारा खोज पिछले युगों की तुलना में एक आधुनिक घटना प्रतीत होती है। इस मार्ग से होकर भारतीय उपनिवेशी, व्यापारी व पुजारी भारतीय सभ्यता को सुदूर पूर्व मुंडा टापू तक और पूर्व के माल-असबाब, विज्ञान तथा धर्म को

  1. द ग्रेट कॉमनवैल्थ, पृष्ठ 20