14 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
1500 वर्ष तक राज किया। मिस्र निवासी, असीरियन, अकाडियन्स सुमेरियन्स और फोलीसियन्स सभी इसी तूरानी वंश की शाखाएँ हैं। मिस्र साम्राज्य के स्थापित होने के लगभग 150 वर्ष बाद अर्थात् 2500 ई.पू. में, और अक्काडियन वंश द्वारा बहुत समय तक बेबीलोन पर राज्य किए जाने के पश्चात्, आर्यों ने चालडिया पर आक्रमण किया और उसी समय फारस की खाड़ी के कन्नाइटस तथा फारस पर द्रविड़ों में दबाव डाला और कन्नानइटस को उत्तरµपश्चिम में तथा द्रविड़ों को भारत में दक्षिण पूर्व में खदेड़ दिया। आर्यों ने भारत पर जब आक्रमण किया तो द्रविड़ों ने उनका डट कर मुकाबला किया। इसी कारण वे ईसवीं सन् से पंद्रह सौ वर्ष पूर्व तक पंजाब की सीमाओं से आगे नहीं बढ़ सके। ख्1, इसके बाद महत्त्व तथा कलात्मक दृष्टि से भारत तथा भारत राज्य के बीच सम्पर्कों की बात आती है। बाइबिल में साक्ष्य मिलने के बावजूद भी, लेखक गण इसे ऐतिहासिक महत्त्व नहीं देते। परंतु प्रमाण इतना ठोस है कि इसकी उपेक्षा नहीं की जा सकती। ख्2, मुख्य भूभाग के अन्दर बसा होने के कारण जूडिया भारत से सीधा व्यापारिक संबंध विकसित नहीं कर सका। उसके पास कोई जलीय भाग नहीं था और इसी कारण कोई बंदरगाह भी नहीं था। वे पूर्णतः मिस्र तथा सीरिया पर आश्रित थे। क्योंकि समुद्र तथा भारत के व्यापार मार्गों पर उनका नियंत्रण था। भारत की विशाल नावें अपना सामान यमन या अरेबिया फैलिक्स तक लाती थीं। यमन भारत के सामान के लिए बड़ी मंडी था। यह वितरण केंद्र था और यहाँ से भारतीय माल व्यापारियों द्वारा सीरिया व मिस्र के जहाजों से मिस्र ले जाया जाता था। फ्बहुत पुराने समय से सीरिया व मिस्र भारत से विभिन्न प्रकार के मसाले, सुगंधित पदार्थ, धातु का सामान, कीमती व सुगंधित लकड़ी, रत्न, हाथी दाँत का सामान तथा अन्य कीमती वस्तुएँ मँगाते थे जो भारत में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध थीं। ख्3, तथापि राजा सोलोमन जब गद्दी पर बैठा, तो उसने भारतीय व्यापार पर नियंत्रण करने का प्रयास किया। उसने देखा कि मिस्र की सत्ता का पतन हो रहा है और महसूस किया कि भारत से सीधा व्यापार करने के लिए लाल सागर पर इंदुमी को बंदरगाह के रूप में प्रयोग करना महत्त्वपूर्ण है। लेकिन चूँकि यहूदियों को समुद्री जहाज चलाने का अनुभव नहीं था, उसे फोनीसिया के राजा हिरेन का सहयोग लेना पड़ा। फोनीसियन समुद्री जहाज चलाने में माहिर थे। वे लोग भारत से सीधा व्यापार करते थे अथवा नहीं यह बहुत विवाद का विषय है। राबर्टसन के अनुसार, उनका भारत से सीधा व्यापार पर था। यह दिखाने के बाद कि अनुपजाऊ भूमि के कारण फोनीसिया
गुस्टेव ओपर्ट, फ्आन एन्सेंट कॉमर्स ऑफ इंडियाय् मद्रास जर्नल ऑफ लिटरेचर एण्ड साइंस में प्रकाशित, (1878), पृष्ठ 189-91 मालाबारी और मिस्री प्रथाओं की समानता के बारे में देखिए ई. जे. सिमूक्स द्वारा लिखित ‘प्रिमिटिव सिवलिजंशंस, भाग 1 और 2
डब्लू. राबर्टसन, फ्डिस्क्विजिशन’, पृष्ठ 9-10
आई. लेनोरमेंट और ई. शेवेलियरः फ्एन्शेंट हिस्ट्री ऑफ द ईस्टय्, भाग-1, पृष्ठ 144