अध्याय-1 : प्राचीन भारतीय वाणिज्य - Page 33

18 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

बेबीलोनिया का पतन भी उसी तरह अकस्मात् हुआ जिस तरह उसका उत्थान हुआ था और यह प्रक्रिया राजा डेरियस (579µ484 ई.पू.) के शासनकाल से आरम्भ हुई थी। पाँचवी शताब्दी के बाद हमें पहले की भाँति पर्याप्त संख्या में व्यापारिक पट्टियाँ नहीं मिलती। फारस की विजय ने बेबीलोनिया को ही तबाह नहीं किया अपितु वे मिस्र तक पहुँच गये। जो नहरें नदियों द्वारा माल ले जाने के लिए बनाई गयी थीं वे खराब होने लगीं और नदियों का बहाव बाँधों के कारण रुक गया। इसके परिणामस्वरूप अरब के लोग व्यापारी हो गये और यमन की बेबीलोनिया और पालमायरस के वैभव के प्रति रुचि बढ़ी। डेरियस के महत्त्वपूर्ण समुद्री अभियानों के बावजूद चालडीन्स ने गैरहा तथा अन्य स्थानों पर बस्तियाँ बसा कर अपना व्यापार जारी रखा।

डेरियस ने अपने शासनकाल के दौरान बहुत से युद्ध जीते और उसका साम्राज्य सिकंदर के साम्राज्य के समीप तक पहुँच गया। भूमि के भूखे दोनों राजाओं के लिए अच्छे पड़ोसी बन कर रहना नितांत असंभव था। उनके बीच झगड़ा अवश्यम्भावी था और सिकंदर जो ऐसे अवसर की प्रतीक्षा में था, अपने विजय अभियान के लिए निकल पड़ा। एक ही हमले में उसने डेरियस के साम्राज्य को नष्ट कर दिया और मिस्र, मध्य एशिया तथा भारत के उत्तरी भाग पर अधिकार कर लिया।

सिकंदर के विराट अभियान के उद्देश्य के बारे में कई अटकलें हैं। एक तर्क यह दिया जाता है कि डेरियस ने जो उसका अपमान किया था उसका बदला लेने के लिए वह इस अभियान पर निकला। परन्तु प्रोफेसर लासैन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सिकंदर की यात्रा का उद्देश्य मात्र सोने की लालसा थी और यूनान में पहुँचे भारत के माल ने उसकी इस लालसा को तेज किया। यूनान और जूडिया के साथ व्यापारिक सम्बन्ध होने से इन व्यापारी देशों के लोगों की भाषा पर भी प्रभाव पड़ा है। इस प्रकार चावल का यूनानी नाम (ओरीजा), अदरक का (जिंदीबर) और दालचीनी का (कारपिओं) तमिल नामों क्रमशः अरीसी, इंचीवर और कारावा से मिलतेµजुलते हैं और यूनानी तथा तमिल शब्दों की इस समानता से स्पष्ट हो जाता है कि यूनान के व्यापारियों ने तमिल क्षेत्र की इन वस्तुओं को तथा इनके नाम को यूरोप में पहुँचाया। फ्यवनय् वह नाम जिससे पश्चिम के व्यापारी जाने जाते थे और जिसका प्रयोग संस्कृत कविता में यूनान के लोगों के लिए किया जाता है, यूनानी शब्द फ्जाओनिसय् से लिया गया है जो स्वयं उनकी भाषा में उन लोगों के लिए प्रयोग किया जाता है। ख्1, दूसरा शब्द जिसे इस समूह में जोड़ा जा सकता है, जो वह हाथी या हाथी दाँत के लिए प्रयुक्त हुआ है, और जिसकी उत्पत्ति एक ही मूल शब्द से हुई है वह यूनानी में ‘एलीफैस’ मिस्री में ‘एबू’ तथा संस्कृत में ‘एमा’ है और ये सब प्रोफेसर लैसन के अनुसार संस्कृत मूल के ही हैं।

  1. आर.के. मुखर्जी इंडियन शिपिंग, पृष्ठ 121