24 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय
भारत के विदेशों के साथ व्यापार का यह संक्षिप्त ब्यौरा देने के बाद अब हम व्यापार की वस्तुओं, व्यापार मार्गों तथा भारत के महत्त्वपूर्ण पत्तनों पर विचार करेंगे।
दि पेरीप्लस, पटोलेमी लिखित भूगोल तथा ईसाई टोपोग्राफी व्यापार की वस्तुओं तथा भारत के महत्त्वपूर्ण पत्तनों के बारे में जानकारी के मुख्य स्रोत हैं।
दि पेरीप्लस के अनुसार निम्नलिखित वस्तुओं का निर्यात किया जाता थाः (1) जटामांसी, (2) कोरटस, (3) गुग्गुल, (4) हाथी दाँत, (5) क्यूगेट, (6) लाइसीरेग, (7) सभी प्रकार के सूती कपड़े, (8) रेशमी कपड़े, (9) एक प्रकार के जंगली पौधे से बने कपड़े, (10) धागा, (11) पिपरामूल, (12) हीरे, (13) नीलमणि, (14) कर्पर, (15) सभी प्रकार के पारदर्शी पत्थर, (16) मोती, (17) मालावथरूम, (18) सुगंध, (19) नील। जिन वस्तुओं का आयात होता था उनका विवरण है, (1) शराब, (2) ताँबा, (3) टीन, (4) सीसा, (5) मूंगा, (6) सभी प्रकार का पतला तथा घटिया कपड़ा, (7) बनमोथी, (8) कठोर तथा अपरिष्कृत शीशा, (9) सुरमा, (10) सोने चाँदी के सिक्के जो अनुकूल व्यापार संतुलन की देन थे।
दि पेरीप्लस या हिंद महासागर की मैरीन गाइडबुक में भारत के पत्तनों का उल्लेख है जहाँ से व्यापार होता था µ (1) बरीगजा या वर्तमान भड़ौच जो पश्चिमी भारत का मुख्य व्यापारिक केन्द्र था। इसमें भड़ौच से जुड़े भारत के दो कस्बों का उल्लेख है अर्थात् पैयाग और तागरा, (2) सूपरा µ आधुनिक सुपारा जो बसीन के पास है, (3) कोलीयन µ वर्तमान कल्याण, (4) सैमुल्ला संभवतया आधुनिक चैंबूर, (5) मंडागोरा, (6) प्लाइमतामी, (7) मेलजीगारा, (8) टाइनडिस, (9) मुजीरिस, (10) नैलकियंडा।
‘पटोलमी का भूगोल’ में सिंध नदी के मुहाने से लेकर गंगा नदी के मुहाने तक समुद्री तट का वर्णन किया गया है और इसमें व्यापारिक महत्त्व के कई कस्बों तथा पत्तनों का उल्लेख है। ये पत्तन हैं µ साइरास्त्र (सूरत), गुजरात में मोनोग्लासम (मंगरोल), आरिआके (महाराष्ट्र), सौपारा, मुजीरिस, बकरेई, मैसोली (मछलीपट्टनम), कोनागरा और अन्य। ख्1,
कुछ तमिल कवियों ने बड़े सुन्दर ढंग से दक्षिण भारत के व्यापारिक पत्तनों तथा नगरों का वर्णन किया है। एक कवि का कहना है फ्हरा-भरा नगर मुचीरी जहाँ यवनों के सोने से लदे सुन्दर तथा बड़े जहाज केरल के पेरीप्लस पत्तन जो चेरला में हैं, पर सफेद झाग फैलाते हुए आते हैं और काली मिर्च से लद कर लौटते हैंय् एक अन्य कवि का कहना है कि ‘मछली के बदले धान दिया जाता है, जिसे टोकरियों में भर कर घर लाया जाता है। मिर्च के बोरे घरों से बाजार तक लाए जाते हैं। बेची गयी वस्तुओं के बदले जहाजों से प्राप्त हुआ सोना
आर.के. मुखर्जी, ‘इंडियन शिपिंग’, पृष्ठ 134
आर.के. मुखर्जी, ‘इंडियन शिपिंग’, पृष्ठ 135