अध्याय-1 : प्राचीन भारतीय वाणिज्य - Page 41

26 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

तथा उनके जानवर थकान के बाद ताजा हो सकते थे। विश्राम करने के ये स्थान वाणि् ाज्य के मुख्य केन्द्र बन गये और वहाँ जगह-जगह पर मन्दिर तथा देवालयों का निर्माण किया गया जिनकी सुरक्षा में व्यापारी अपना व्यापार करते थे और जहाँ यात्री तीर्थ के लिए जाते थे।य् ख्1, इन परिस्थितियों के कारण व्यापारियों का मार्ग कभी भी सीधा नहीं होता था, यह सदैव टेढ़ा-मेढ़ा होता था। प्राचीन व्यापार के मानचित्रों को देखें तो हम छोटी-छोटी सड़कों का जाल पाएँगे जो कई स्थानों पर एक-दूसरे से मिलती है और एक-दूसरे को काटती हैं। तथापि, हम भारत से भूमध्य सागर तक दो मुख्य व्यापार मार्ग पाते हैं। एकदम उत्तरी मार्ग आक्सस नदी के साथ-साथ जाता है और कैस्पियन सागर के उत्तरी बंदरगाह का घेरा डालते हुए काले सागर की ओर मुड़ते हुए कुस्तुनतुनिया तक जाता है। मध्य का मार्ग कुछ हद तक अनेक विभाजनों के बावजूद सीधा जाता है। यह कैस्पियन सागर के दक्षिण मुहाने से आरम्भ होता है और टैवरिज, इरज्बैम, ट्रैबीजोन्द और काला सागर से होता हुआ कुस्तुनतुनिया पहुँचता है। भारत तथा पश्चिम के बीच ये दो व्यापार मार्ग थे।

दो समुद्री मार्ग भी थे यद्यपि उनमें से एक मार्ग आधे फासले तक ही समुद्री मार्ग था। इनमें से एक लाल सागर का मार्ग था। भारत के पत्तनों से जहाज हिन्द महासागर को पार करके या तो दक्षिण अफ्रीका जाते थे या ऊपर को चल कर दक्षिणी अरब तथा अदन के पत्तनों को छूते हुए सैंट ऑफ बाबैल मानडैब (गेट ऑफ टीयर्स) होकर लाल सागर से गुजरती हुई, अरब सागर के तट जैदा और मिस्र के तट बरनिस होते हुए जाते थे। बरनिस से व्यापारियों द्वारा माल थैब्स और कोस ले जाया जाता था जहाँ से नील नदी के रास्ते उसे अलेक्जेंड्रिया पहुँचाया जाता था और वहाँ से यूरोप ले जाया जाता था। दूसरा समुद्री मार्ग फारस की खाड़ी होकर जाता था। भड़ौच से जहाज चल कर तट के साथ-साथ मस्कट तथा ओसून पहुँचते थे और वहाँ से ओमन की खाड़ी होते हुए बसोरा पहुँचते थे। फारस की खाड़ी स्थित बसोरा से व्यापारियों द्वारा माल कारवाँ में यूफ्रेटस और टिगरिस के तटों से साथ बेबीलोनिया से भूमध्य सागर में स्थित एन्टीओच ले जाया जाता था।

ये समुद्री मार्ग वर्तमान काल तक चलते रहे, लेकिन भूमि-व्यापार मार्गों की कहानी पूर्णतः भिन्न है। ये एक बार बंद हुए तो सदा के लिए बंद हो गये। पहले इसके बंद होने का इतिहास संभवतया एशियाई महाद्वीप की केवल एक ऐसी घटना है, जिसने यूरोप के इतिहास को गम्भीर रूप से प्रभावित किया।