अध्याय-2 : मध्ययुग में भारत के व्यापारिक सम्बन्ध अथवा इस्लाम का उदय और पश्चिमी यूरोप का विस्तार - Page 48

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ने अपने साम्राज्य का विस्तार करने का प्रयास किया। एक बड़ी सेना लेकर उसने दक्षिण दिशा में चीन की ओर कियू राजतन्त्र को तबाह करने के लिए कूच किया, जो पहले ही बड़ी बुरी तरह डगमगा चुका था। तभी तुली ने शोंसी की ओर से होनान प्रांत में प्रवेश किया। इन दोनों के आक्रमण का कियू की सेनाओं ने डटकर मुकाबला किया, लेकिन मंगोलों के कौशल और उत्साह ने विरोधियों को परास्त कर दिया। उनके शवों के ढेर लगा दिये और उन्होंने अपने शत्रुओं की राजधानी काईफेंग फू पर कब्जा कर लिया। राज कोई फेंग फू से भाग कर जुनिंग फू चला गया। परंतु मंगोल सेना उसका पीछा करती हुई जल्दी ही वहाँ पहुँच गयी। भूख प्यास सहन करते हुए कुछ सप्ताहों तक कियू की सेना ने डट कर मुकाबला किया लेकिन अंततः उसे मंगोलों के सामने हथियार डालने पड़े और सम्राट ने फाँसी लगा कर अत्महत्या कर ली। ख्1, इससे संतुष्ट न होने पर ओगादी ने 1235 ई. में सुंग यंग से कियांग के दक्षिण और कोरिया में चीन के सुंग राजवंश के खिलाफ सेना भेजी।

पूर्वी एशिया में अपनी जीत सुनिश्चित करने के पश्चात् ओगेडी का ध्यान पश्चिमी एशिया की ओर गया। उसने 1236 ई. में जारजिया और ग्रेट आरमीनिया पर आक्रमण करके टिफलिस तथा फारस को अपने अधिकार में ले लिया और अपने भतीजे बाट के अधीन एक बहुत बड़ी सेना पूर्वी यूरोप भेजी। बाट ने बलगार की राजधानी रियाजन पर आक्रमण किया जिसने 21 दिसम्बर, 1237 को हथियार डाल दिये और उन पर इतने अत्याचार किये कि मरने वालों पर रोने के लिए एक आँख भी खुली न रही। उसने मरस्का और उसके बाद बलाडीमी और कोजेसक को जीत लिया, पोलैंड व हंगरी पर भी उसी प्रकार अधिकार कर लिया।

मंगोलों के उत्थान के साथ-साथ ओहोमेन्स के नाम से जाने जाने वाले तुर्की भी शक्तिशाली होते जा रहे थे। ये वे खानाबदेश कबीले थे जो सनगारिया के मैदान गोबी के रेगिस्तान के मध्य रहते थे। दंतकथाओं के अनुसार कारखान का पुत्र ओघुज ओहोमन तुर्कियों का जनक था। इतिहास में उनका पहली बार प्रादुर्भाव 1227 ई. में हुआ। उसी वर्ष दो हजार से चार हजार लोगों का एक गिरोह अपने साथियों तथा दासों के साथ जिन्हें मंगोलों के आक्रमण के दबाव के कारण मध्य एशिया में अपने घरों से निकाल दिया गया था और जिन्होंने कोनिया के सैलजुक सुलतान अदाउद्दीन कैकोबाद के पास व्यर्थ ही शरण ली थी, अपने सुलतान सुलेमान शाह के नेतृत्व में अपने देश को लौट रहे थे। वे यूफरेटस नदी को जो जावेर किले से ज्यादा दूरी पर नहीं थी, पार कर रहे थे कि अचानक उनके नेता के डूब जाने से उनमें घबराहट फैल गयी। जिन लोगों ने अभी नदी पार नहीं की थी उन्होंने इस

  1. विश्वकोश, ब्रिटानिका, 11वाँ संस्करण, खंड 18, पृष्ठ 712 ‘मंगोल’

  2. विश्वकोश, ब्रिटानिका, 11वाँ संस्करण, खंड 27, पृष्ठ 441-443