अध्याय-2 : मध्ययुग में भारत के व्यापारिक सम्बन्ध अथवा इस्लाम का उदय और पश्चिमी यूरोप का विस्तार - Page 49

34 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर सम्पूर्ण वाघ्मय

घटना के कारण नदी पार करने से मना कर दिया। चार सौ योद्धाओं के एक गिरोह ने डूब गये नेता के पुत्र ऐरटोघरूल की मातहती में रहने का निश्चय किया। ऐरटोघरूल ने पहले इरजैरूम के पूर्व में जैसिन में पड़ाव डाला। अदाउद्दीन से की गयी दूसरी अपील को अधिक सफलता मिली और अप्रवासियों की संख्या इतनी कम रह गयी कि उनसे उनको कोई खतरा नहीं रहा। नये आगंतुकों को अंगोरा के पास काराजाबाग की भूमि दे दी गयी जहाँ बड़े घास के मैदान तथा जोड़ के मकान थे। एरटोघरूल इस संकट के समय सेलुजुकी राजा को दी गयी सहायता से सागून उसकी जागीर बन गया और युद्ध क्षेत्र विधिवत उसके पास आ गया। एरटोघरूल की नब्बे वर्ष की आयु में 1288 में मृत्यु हो गयी। उसके बाद उसका पुत्र ओसमान कबीले का सरदार बना। तैबरिज के राजा और चंगेजावा के एक सूबेदार महमूद खाँ गजन के आक्रमणों से चकनाचूर होने पर जब सेलुजुक साम्राज्य छिन्न-भिन्न होने वाला था तो इसके अधिकांश सामन्ती जागीरदारों ने इसके पतन को रोकने की बजाय इसके पतन में सहायता की, ताकि वे अपनी जागीरों के स्वतन्त्र शासक बन सकें। लेकिन ओसमान अपनी निष्ठा में अडिग रहा और यूनानियों पर बार-बार जीत से अपने अधिराज को कमजोर होने से बचा लिया। सबसे पहले उन्होंने 1295 ई. में कजोरा हिसार पर विजय पायी जहाँ सबसे पहले साप्ताहिक प्रार्थना में सुलतान के नाम के स्थान पर ओसमान का नाम लिया जाने लगा। उन्होंने जो इलाके तलवार के जोर से जीते थे, अलाउद्दीन कैकीवाद-दो, ने उसी वर्ष उनके मालिकाना अधिकार उसे दे दिये और साथ ही घोड़े की पूँछ, ढोल तथा झंडा पेश किये जो स्वतन्त्र कमांड के प्रतीक थे। ओसमान ने यूनानियों के विरुद्ध अपनी जीत का सिलसिला जारी रखा और अपनी वीरता तथा हरमन काया के सामन्त कैंसी मिखाल से दोस्ती करके ऐनक्वेल बिलेजिक और थार हिसार का मास्टर बन गया। 1300 ई. में सेल्जुक साम्राज्य टूट गया और इसके खंडहरों पर अनेकों छोटे राज्य अस्तित्व में आये। उनके संरक्षक और हितैषी सुलतान अलाउद्दीन-दो, की मृत्यु के पश्चात् ही ओसमान ने अपनी स्वतन्त्रता की घोषणा की और तुर्की इतिहासकारों के अनुसार इस घटना के दिन से ही ओहोमन साम्राज्य की स्थापना हुई। ख्1, तुर्की साम्राज्य काफी लम्बा-चौड़ा थरा। तुर्कों ने एशिया-माइनर में शासन किया। तुर्कों ने मिस्र पर शासन किया, तुर्कों ने मंगोलों के अधीन सीरिया तथा मैसोपोटामिया में कुछ अधिकार प्राप्त कर लिये जबकि चंगेजखाँ के वंशजों ने फारस में खलीफा के साम्राज्य को जीता। वोल्गा के बीहड़ क्षेत्र में और उराल के पहाड़ों में आंकसस के मैदानों में तथा टारंटारी के रेगिस्तान में प्रभुसत्ता प्राप्त कर मध्य एशिया के पास राज्य बढ़ा लिया। इसके साथ ही उन्होंने चीन में साम्राज्य स्थापित किया। उसी समय भारत में चंगेज खाँ मंगोल राज्य स्थापित करने की तैयारी कर रहा था, जिसको हम महान मुगल के नाम से जानते हैं। ख्1, लेकिन तुर्कों की शक्ति को एक बार ऐसा धक्का लगा कि उनका शासन सदा

  1. स्टेनली लेन पूल µ ‘टर्की’ (न्यूयार्क, 1899), पृष्ठ 7