35
के लिए समाप्त हो गया। ठीक उसी समय जब सुलतान अपने चरम उत्कर्ष पर था, जब उसका हुक़्म निर्विवाद रूप से यूरोप और एशिया में वाइजेनटियम साम्राज्य के अधिकांश क्षेत्र में चलता था, जब ईसाई राज्य उसे विश्व के लिए एक दैत्य समझ कर उससे दहशत खाते थे, एक ओर उससे भी बड़ा दैत्य उसको दमन करने के लिए आया और एक ही झटके में पूरे साम्राज्य को, जो बायेजिद ने इतने उत्साह से बनाया था, धराशायी कर दिया और यह भयानक विजेता तिमर, तातार अथवा तैमूरलंग था। चंगेजखाँ की लम्बी-चौड़ी सल्तनत का विनाश होने पर जो छोटे-छोटे सुलतान बन गये थे उनको तैमूर ने अपने अधीन कर लिया। तैमूरलंग ने हर कार्य तलवार की नोक पर किया और बयेजिद के अंतर्गत जितने प्रांत थे जीत लिए। 1402 में तातार और तुर्क आमने-सामने हुए। जब तुर्क तुनतुनिया का घेरा डोलने में व्यस्त थे, सुलतान ने अपनी सेना के ऊपर तैमूर की विजय की खबर सिवांग में सुनी। बयेजिद ने सेना इकट्ठी की और शीघ्र सामना करने के लिए स्वयं गया। किन्तु वह अंगोरा में हार गया और तुर्की साम्राज्य टुकड़े-टुकड़े हो गया। ख्1, बड़ी पटुता से खड़ा किया गया तथा बड़ी बहादुरी से सुरक्षित रखा गया तुर्की साम्राज्य एशियाई तानाशाह से परास्त हो गया। फ्ओटोमन्स का इतिहास अचानक समाप्त हो गया प्रतीत होने लगा। बायेजिद को जो अपने उत्कर्ष पर था बंदी बना लिया गया और उसे जंजीरों से बाँध दिया गया। विश्व में कभी भी इतनी बुरी तरह किसी का भी पतन नहीं हुआ।य् ख्2,
दुर्भाग्य से तैमूरलंग अपनी विजय के फल के लिए जीवित नहीं रहा, पर उसका यह धक्का ओटोमन्स साम्राज्य के लिए अन्तिम प्रहार सिद्ध नहीं हुआ। श्री लेनपूल का कहना है, फ्तुर्कों के शासन का सबसे अधिक आश्चर्यजनक लक्षण इसकी जीवन-शक्ति है। जानकार भविष्य वक्ताओं ने इसके सर्वनाश की घोषणा की है और फिर भी यह अभी तक जीवित है। एक-एक करके कई प्रांत साम्राज्य से निकल गये फिर भी सुलतान का अधिकार क्षेत्र बहुत बड़ा है, कई वंशों के लोग सुलतान का आदर करते हैं अथवा इससे डरते हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए कि एक तुर्क सुलतान में एक शासक के गुण कितने ही कम क्यों न हों, उसने तलवार के बल पर जीते लोगों के साथ सुलह करने के लिए चाहे कितनी ही कम तकलीफ क्यों न की हो, यह आश्चर्य की बात है कि उसका प्रभाव बहुत अधिक था और सत्ता अडिग थी। एक दर्जन वर्षों में ही हारे हुए प्रांतों को दुबारा शक्तिशाली और योग्य शासनकाल के दौरान पुनः जीत लिया गया और 1402 ई. में हुई भारी पराजय के परिणामस्वरूप कमजोर होने के बजाय उसके पतन के बाद और अधिक शक्तिशाली तथा प्रभावशाली हो गया और एक नयी शक्ति प्राप्त दैत्य की तरह साहस के साथ नये क्षेत्र जीतने की तैयारी करने लगा। ख्3, अच्छी सम्भावनाओं से खुश होकर मुहम्मद
वही, पृष्ठ 7
वही, पृष्ठ 73
स्टेनली लेनपूल µ ‘टर्की’ पृष्ठ 74-75